अगले बरस तु जल्दी आना...... गणपति बप्पा मोरया 

शहर की सड़के हुई गुलाल से सरोबार
बाड़मेर।
ग्यारह दिवसीय गणपति महोत्सव के बाद गुरूवार को स्थानीय जसदेर तलाब ओर सोननाडी में गणपति का विसर्जन किया गया। इससे पहले षहर में बाड़मेर षहर में ढ़ोल की थाप ओर डीजे की धुन पर नाचते हजारो युवाओं ने गणपति बप्पा मोरिया की गूंज के साथ षोभायात्रा निकाली गई। षहर के विभिन्न मौहल्लो में स्थापति छोटे और बड़े गणपति के विसर्जन के लिए कई षहर के मुख्य मार्गो से होते हुए कई जसदेर तो कई सोनतलाब पहुंची। शहर के सभी रास्ते गणपतिमय हो गये है। सभी रास्तों में श्रद्धालुओं के बाजे-गाजे के साथ नाचते और झूमते हुए गणपति को विदाई देने के लिए गंतव्य स्थान पहुंचने के लिए गणपति बप्पा मोरया... और गणपति चले गावा ला... अर्थात गणपतिजी अपने गांव जा रहे हैं के जयघोष के साथ पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। इस वर्ष अनुमान के अनुसार लगभग 300 से 400 गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ है। षहर के साथ साथ कई गांवो से भी गणपति विसर्जन पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। 
मुस्तेद दिखी पुलिस-स्थानीय जसदेर तालाब पर पुलिस प्रषासन की ओर से पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था नजर आई। जसदेर तालाब पर अलग से कुण्ड बनाकर उसमें गणपति विसर्जन की व्यवस्था की गई थी जिससे लोगो ने आराम से विधि विधान के साथ भगवान गणपति को अगले बरसे जल्दी आने के वादे के साथ विदाई दी। 
आजाद युवा ग्रुप ने की थी पहली बार स्थापना- गौरतलब है कि 2005 में स्थानीय आजाद चैक प्रांगण में आजाद युवा गु्रप की ओर से स्थापना की गई थी जिसका नतीजा ये है हर वर्श लोगो की आस्था भगवान गणपति को लेकर अपार आस्था नजर आने लगी है। नतीजन वर्तमान में षहर में गणपति महोत्सव पुरे परवान पर है। 
पहली ईकोफैन्डली प्रतिमा- आजाद युवा गु्रप की ओर से पहली स्थापना के बाद पहली ईकोफैन्डली पत्थर की प्रतिमा लाने का कार्य किया। वर्तमान में आजाद युवा गु्रप की ओर से षहर में षोभायात्रा के बाद पूनः प्रतिमा को तय स्थान पर स्थापित किया जाता ओर उसके बाद पूरे वर्श तक उसकी पूजा अर्चना की जाती है।

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