पति को छोड़ बहन बनी सगे भाई की पत्नी 
सीकर।
टूटते सामाजिक रिश्तों की इससे बड़ी बानगी क्या होगी? पति को छोड़ बहन सगे भाई की पत्नी बन गई। भाई ने भी पत्नी को त्याग दिया। दोनों नाम बदलकर पांच वर्ष तक सीकर में रहे, लेकिन यह रिश्ता छुप न सका। पत्नी बनी बहन ने बुधवार रात आत्महत्या कर ली। पुलिस जांच में मामले की परतें खुलीं तो हर कोई दंग रह गया।
जयपुर जिले के शाहपुरा क्षेत्र के धवली आमलोदा गांव निवासी सुनील उर्फ मुकेश उर्फ पप्पू और उसकी सगी बहन उषा कृषि उपज मंडी के पीछे किराए के मकान में पति-पत्नी की तरह रहते थे। बकौल पप्पू वह बहन से ज्यादा पत्नी थी। मौत का कारण पूछने पर उसने बताया कि आर्थिक तंगी के चलते वह परेशान थी। इसको लेकर बुधवार शाम को उनमें कहासुनी हुई थी।
इसके बाद वह घर से बाहर निकल गया। बाद में उषा ने तीन वर्षीय बेटे के सामने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। बच्चे के रोने पर दूसरे किराएदार खिड़की तोड़कर कमरे में गए, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। 

दो वर्ष में खत्म हो गए पैसे
पप्पू ने पांच वर्ष पहले 21 लाख रूपए में अपना मकान बेच दिया था। इसमें से कुछ पैसे उसने उधार के चुका दिए। कुछ पैसे अपनी पहली पत्नी को देकर रिश्ता तोड़ लिया। भाई का हिस्सा देने के बाद करीब छह लाख रूपए लेकर वह सीकर आ गया। यहां पर किराए का मकान लेकर रहने लगा। दो वर्ष तक तो वह इन पैसों से काम निकालता रहा। बाद में यहां कारपेंटर का काम करने लगा।

हमारे लिए मर गए...
पुलिस ने धवली आमलोदा गांव के सरपंच से परिवार की जानकारी पता की। सुनील के नाम पर तो कोई नहीं बता पाया, लेकिन पप्पू का नाम सामने आने पर जयपुर में रहने वाले उसके बड़े भाई राजेश के नंबर मिल गए। राजेश को घटना की जानकारी दी और शव लेने के लिए सीकर आने की बात कही तो उसने...हमारे लिए तो यह पहले ही मर गए कहकर फोन काट दिया।

न लाल जोड़ा, न चुनड़ी
न तो उसे कोई लाल जोड़ा पहनाने वाला था और न ही किसी ने बिंदी और चुनड़ी पहनाई। पप्पू भी दिनभर अस्पताल में मुर्दाघर के बाहर और बाद में श्मशान घाट में बैठा शव को देखता रहा। पूछने पर भी उसने छिपाया भी नहीं। नगर परिषद के सहयोग से उषा के शव का अंतिम संस्कार हुआ और पप्पू ने मुखाग्नि दी।

मेरा क्या कसूर?
तीन वर्षीय मासूम मां को ढूंढ रहा है। पड़ोस की आंटी से पूछता है, मां कहां गई है? बच्चे को देख पड़ोसियों की आंखें भी नम हैं। साथ ही, हकीकत पता चलने के बाद सभी दंग हैं।

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