Govt approves ordinance for land acquisitionभूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन के लिए अध्यादेश
नई दिल्ली।
मोदी सरकार ने देश के विकास के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को सरल बनाने एवं उसके उद्देश्यों को और व्यापक बनाने के लिए अध्यादेश लाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में सोमवार शाम केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। 
सरकार ने भूमि अधिग्रहण कानून-2013 में संशोधन लाने के लिए यह अध्यादेश लाई है। संसद के शीतकालीन सत्र में भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक लाए जाने की चर्चा थी पर सरकार यह विधेयक नहीं लाई। केन्द्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनस्üथापना कानून-2013 में संशोधन करने के लिए अध्यादेश की सिफारिश राष्ट्रपति को की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस कानून में कई प्रावधाओं में संशोधन किए गए हैं। 
जेटली ने बताया कि इस कानून की धारा 105 (ए) के तहत कानून के दायरे से बाहर तेरह क्षेत्रों के लिए एक वर्ष के भीतर यानी 31 दिसंबर 2014 से पहले अधिसूचना जारी होने वाली थी, पर यह अधिसूचना जारी नहीं हो पाई थी। रेलवे और रक्षा जैसे तेरह क्षेत्रों को भूमि अधिग्रहण कानून के दायरे से बाहर रखा गया था। 
भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन के लिए उन्होंने बताया कि अध्यादेश लाते समय किसानों के हितों और समाज की जरूरतों को देखते हुए विकास के संतुलन को भी ध्यान में रखा गया है। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून में किसानों के लिए उच्च मुआवजे का जो प्रावधान था उसमें किसी भी तरह का कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। अलबत्ता यह उच्च मुजावजा उन 13 क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण के दौरान भी जारी रहेगा जो इस कानून के दायरे में नहीं आते। 
उन्होंने कहा कि किसानों को भूमि अधिग्रहण के दौरान मिलने वाला पुनर्वास पैकेज भी जारी रहेगा। जेटली ने बताया कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 की धारा 10 (ए) में 5 नए उद्देश्य भी जोडे गए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा उत्पादन, विद्युतीकरण आदि के लिए ग्रामीण आधार भूत संरचना, सस्ते आवासों के निर्माण औद्योगिक गलियारे बनाने एवं पीपीपी मॉडल पर सामाजिक उद्देश्य के लिए बुनियादी ढांचा विकसित करने वास्ते भी जमीनों का अधिग्रहण किया जाएगा। 
उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में भी भूमि अधिग्रहण के लिए उच्च मुआवजा जारी रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि जमीन की मिल्कियत सरकार के पास रहेगी। भूमि अधिग्रहण कानून 2013 में कुछ और गड़बडियां और गलतियां रह गई थीं। उन्हें भी दूर किया गया है। जैसे "कम्पनी" की जगह इकाई शब्द का प्रयोग किया गया है।
जेटली ने कहा कि गांवों के ढांचागत विकास के लिए ही इस कानून में संशोधन किए गए हैं ताकि लोगों को सस्ते घर बनाकर दिए जा सके क्योंकि 65 प्रतिशत लोगों के पास घर नहीं है। भूमि अधिग्रहण से ही "स्मार्ट शहर" बनेंगे और कच्चे घरों में रहने वालों को पक्के मकान मिल सकेंगे। 
एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि सस्ते घर राज्यों की नीतियों के अनुरूप बनेंगे। यह भूमि अधिग्रहण बडे मकानों के लिए नहीं होगा। उससे लोगों के जनजीवन की अच्छी सुविधा मिलेगी। यह पूछे जाने पर कि सरकार जल्दबाजी में अध्यदेश क्यों लाई है, जेटली ने कहा कि इस कानून के दायरे में बाहर तेरह क्षेत्रों के लिए अधिसूचना की अंतिम तारीख 31 दिसंबर को समाप्त हो रही थी। 
कांग्रेस, जद विरोध करेंगे 
कांग्रेस और जनता दल (यू) ने भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन के लिए मोदी सरकार द्वारा अध्यादेश लाए जाने के फैसले का कड़ा विरोध किया है । ये दोनों पार्टियां इस अध्यादेश का संसद के आगामी सत्र में विरोधभी करेंगी। जद (यू) ने इस अध्यादेश के खिलाफ देश भर में आन्दोलन करने का भी फैसला किया है। क ांग्रेस ने कहा है कि तीन साल के गहन विचार विमर्श के बाद यह कानून बनाया गया था और इसमें सभी पहलुओं को ध्यान में रखा गया था। अब मोदी सरकार ने इसमें संशोधन करने के लिए अध्यादेश लाई है। हम उसका संसद में विरोध करेंगे। 
जदयू ने कहा है कि यह नया अध्यादेश कॉरपोरेट तथा औघोगिक घरानों एवं बिल्डरों के हितों को फायदा पहुंचाने के लिए लाया गया है। पार्टी प्रवक्ता के सी त्यागी ने कहा है कि सरकार ने इस तरह किसानों के हितों की अनदेखी की है। इतना ही नहीं उसने संसद का भी अपमान किया है और उसकी उपेक्षा की है क्योंकि कुछ दिन पहले ही संसद का शीतकालीन सत्र समाप्त हुआ है और सरकार इसे संसद में संशोधित विधेयक लाने की बजाय अध्यादेश लाई। त्यागी ने कहा कि अगर सरकार ने यह अध्यादेश वापस नहीं किया तो जनता दल परिवार उसके खिलाफ देश भर में आन्दोलन छोड़ेगा।

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