महावीर स्वामी जन्मोत्सव में उमड़ा श्रद्धा का जनसैलाब
बाड़मेर
रविवार को प्रातः हर गली-गली मौहल्लों से सज-धज कर पुरूष एवं महिलाओं चेहरे पर उत्साह एवं हर्षोल्लास के साथ शहर स्थित जैन न्योति नोहरे में रविवार को आस्था का समन्दर उमड़ पड़ा, अवसर था समूचे विष्व में अहिसा, अपरिगह, अनेकान्त एवं विष्व बधुन्त सिद्धान्तों के प्रतिपादक जैन धर्म के चैबीसवे तीर्थकर भगवान महावीर स्वामी के 2613 वां जन्म कल्याणक महोत्सव मनाने का। 
महोत्सव समिति के संयोजक वीरचंद वडेरा ने बताया कि रविवार को सुबह 9 बजे कार्यक्रम विधिवत् शुभारम्भ मुनिराज मुक्तिप्रभासागर जी म.सा. एवं गुरूवर्या श्री सुरजनां श्री के मंगलाचरण से एवं जैन न्याति नोहरे पर पचंरगी जैन ध्वज के ध्वजारोहण का लाभ बाड़मेर विधायक मेवाराम चिन्तामणदास जैन परिवार ने लिया ध्वजारोहण के पश्चात् मुनिराज मुक्तिप्रभासागर जी म.सा. आदि ढाणा एवं गुरूवर्या श्री सुरजंना श्री के मगलाचरण एवं बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन, नगरपरिषद् सभापति उषा जैन, जैन श्री संघ के अध्यक्ष नेनमल भंसाली द्वारा जैन ध्वज दिखाकर शोभायात्रा का आगाज किया। 
महोत्सव समिति के मीडिया प्रभारी खेतमल तातेड़ ने बताया कि जैन समाज के लिये विषेष महत्व रखने वाला इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने सुबह से ही जैन न्याति नोहरे में सफेद पोषाक पहने पुरूष एवं मंगल कलष लिये टोली के रूप महिलायें नोहरे पहुॅचकर जन्म कल्याणक महोत्सव में अपनी भागीदारी निभाने के लिये श्रद्धालुओं में उत्साह नजर आया। 

शोभायात्रा का विराट, भव्य, बेमिषाल एवं ऐतिहासिक जुलुस जिन शासन की जयघोष के साथ भगवान महावीर स्वामी की तस्वीर, ऊटो एवं घोड़ो पर सवार जैन ध्वज लिये हुए श्रावक शहर का सुप्रसिद्ध बैन्ड अपनी मधुर स्वर लहरिया बिखरेता हुआ एवं वातावरण को धर्म मय बनाता हुआ चल रहा था, ठोल पार्टी, भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा का रथ जो फूलो से सुसज्जित था रथ में भगवान को साथ मे लेकर चलने का लाभ आसूलाल कल्याणदास श्री श्रीमाल परिवार ने लिया, नासिक ढोल पार्टी, नन्हे-मुन्ने बालक-बालिकाओं के हाथो में जैन ध्वज एवं भगवान महावीर के संदेष लिखे तख्तियाॅ, पट्टिकाए, मंगल कलष धारण किये महिलायें तथा परमात्मा महावीर स्वामी के पारचना का रथ, रथ में चलने का लाभ भरत कुमार, मदरूपचंद वडेरा परिवार ने लिया जो पालने को रथ में विराजमान कर चल रहे थे बाद में हाथी के ओहदे पर सवार होने का लाभ गैरीदेवी धर्मपत्नि चिन्तामणदास कोटडि़या परिवार ने लिया बाद में मुनिराज मुन्निप्रभासागर एवं मनीषप्रभ सागर म.सा. के साथ सिर पर सालों से सुज्जित गले में दुपट्टा डाले पुरूष एवं युवा वर्ग ने महावीर स्वामी के जयकारों के साथ शहर को महावीर मय बनाया। बाद में गुरूवर्या श्री सुरंजना श्री आदि ढाणा, के साथ महिलायें मंगलगीत गाती चल रही थी एवं बाद में विभिन्न प्रकार के भगवान महावीर स्वामी के जन्म से लेकर दीक्षा, केवलज्ञान, निवार्ण इत्यादि आकर्षक झांकिया थी जिसमें माता त्रिषला के चैदह स्वप्न, महावीर स्वामी द्वारा बड़े भाई से दीक्षा की आज्ञा, महावीर स्वामी को सांप द्वारा दसना, महावीर स्वामी की तपस्या में राक्षस द्वारा बाधा, मेसपर्वत पर अभिषेक, देवताओं द्वारा पंच दिव्य दृष्टि, महावीर स्वामी द्वारा लोच, महावीर स्वामी के पांच सिद्धान्त साथ अहिसा, अपरिग्रह, बहचार्य, अचैर्य, कानो में ग्वाले द्वारा कीले ढोकना, भमण अवस्था में देष, बच्चों के साथ खेलना एवं पाठषाला गमन, साप द्वारा उपसर्ग, पावापूरी जलमन्दिर, प्रियवदंा दासी द्वारा बधाई, भगवान महावीर स्वामी का पूरा परिवार जगल में साधना दीक्षा कल्याणक, वर्षाप्रत पारणा इत्यादि कई मनमोदक झांकिया एवं भजनों की प्रस्तुति देते भजन मण्डलीय विभिन्न जैन संस्थाओं द्वारा प्रस्तुत की गई। 

महोत्सव समिति के सहसंयोजक मुकेष बोहरा एवं दिनेष सिघवी ने बताया कि शोभायात्रा का भव्य जूलुस जैन न्याति नोहरे से करमूजी की गली महाबार रोड़, चैहटन फाटक, मोक्षमार्ग, विद्यापीठ, सच्चियाय माता मन्दिर, लक्ष्मी बाजार, पीपली चैक, जवाहर चैक पुरानी सब्जी मण्डी, चन्दप्रभु जिनालय, गांधी चैक, जैन भोजनषाला स्टेषन रोड़, रेल्वे स्टेषन, लक्ष्मी सिनेमा, सुभाष चैक, जगतम्बा माता का मन्दिर रोड़ से रिख्बदास ठेकेदार मार्ग, षिवकर रोड़ होती हुई जिन कान्तिसागर सुरी आराधना भवन पहुॅची जहां शोभायात्रा धर्मसभा मे परिवर्तित हुई। 

धर्मसभा में मुनिराज मुक्तिप्रभसागर जी के मंगलाचरण से कार्यक्रम शुरू हुआ। इस अवसर पर जैन श्री संघ के अध्यक्ष नैनमल भंसाली ने कहा कि भगवान महावीर के उपदेष एवं संदेष हमारे जीवन में उतारे एवं आधुनिक युग में बच्चों को संस्कारित बनानवे अखिल भारतीय खतरगच्छ महासंघ के उपाध्यक्ष रिखबदास मालू ने कहा कि अपने अहम् को त्यागकर महावीर के सिद्धान्तो को अपनाये एवं भाइचारे की भावना रखे, संयोजक वीरचंद वडेरा ने कहा कि धर्म जब धारणा नही होता है तब तब लगता है समाज को कुछ कना चाहिए। महावीर जन्म कल्याण महोत्सव इसके सूचक है। 

नगरपरिषद् सभापति उषा जैन ने कहा कि 84 लाख जीव योनिक में भरकर मनुष्य जीवन मिला है इसे तभी सार्थक किया जा सकता है तब हम भगवान महावीर के बताये सिद्धान्त एंव उपदेष को हमारे जीवन में उतारे तथा आज दुनिया को फिर भगवान महावीर की जरूरत है जो करूणा मन प्रेम का दीप जला सके एवं जैन धर्म के सिद्धान्त पर चल सके। 

साध्वीवर्या सिद्धाजना ने कहा कि आज उल्लास है जन-जन के हदय सम्राट जो शासन के राजा है श्रवण भगवान महावीर स्वामी जिनका का आज जन्मकल्याणक है। शासन के रक्षक क्षमामूर्ति परमकारक का आज जन्मकल्याणक है। उनका जन्म जगत के लिये एवं इनकी दीक्षा मोक्ष निर्वाण इत्यादि जग के लिये ही हुआ है। आज के समय में दो ही तत्व है एक आत्मा एवं परमात्मा। आत्मा के रूप में हम सब विराजित है सिद्धो के बताये मार्ग पर चलते है वे परमात्मा होते है। भगवान महावीर के सिद्धान्त सत्य अहिसा, अस्तेय, बहमचर्य, अपरिग्रह का यह उपदेष अपने जीवन में उतारे। 

मुनिराज मनीषप्रभ सागर ने कहा कि श्रमण भगवानी महावीर स्वामी जन्म के समय तीन ज्ञानो के स्वामी थे। संसार में रहते हुए संसार विरक्त रहते थे। महावीर ने यह उपदेष दिया कि किसी के संयोग से कर्म का श्रय नही हाूेता है। कर्मो का स्वय भुगतना पड़ता है। आष्वकता है हमे महावीर के सिद्धान्तों को अपनाने की ।हम प्रभु की रोज पूजा करते है व आदेष की पालना नही करते है। जीतते नही है जैन वही है जिनके रोम रोम करूणा के भाव है। 

जैन श्री संघ के महामंत्री किषनलाल ने मंच का संचालन किया तथा इस शोभायात्रा एवं महोत्सव में सहयोग देने पर जैन श्री संघ की ओर से जैन समाज की संस्थााओं, आमजन मीडिया पुलिस प्रषासन, जिला प्रषासन, नगरपरिषद सहित सभी का आभार व्यक्ति किया। 

इसी के साथ शोभायात्रा में झांकियो के विजेता प्रथम जिनदादा भक्त मण्डल द्वितीय श्री पाष्वजैन मण्डल, तीसरे एवं अपर ज्योति दीप गु्रप की रही इनको तथा बाकी झांकियो को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। 

इस अवसर पर पूरे दिन जैन समाज के सभी व्यापारिक कारोबर बन्द रखा गया। और सभी जैन बन्धुओं ने अपने-अपने घरों पर जैन ध्वज फराहया और रात्रि में घी का दीपक जलाया। 

शोभायात्रा का स्वागत:- 

शोभायात्रा का स्वागत जगह-जगह तोरण द्वारों, हिर्डिग्स एवं रंग बिरगी रंगोली तथा भगवान के रथ के आगे अक्षत की गहुली से स्वागत तथा लोगो द्वारा घर की छतो पर पुष्पवर्षा तथा विष्वहिन्दु परिषद् द्वारा पुष्प वर्षा की गई एवं जगह-जगह शीत जल, ठण्डाई, शरबत, प्रसादी इतयादि विभिन्न श्रद्धालुओं संस्थाओं द्वारा आयोजन किया। शोभायात्रा की सुरक्षा व्यवस्था जैन सोसियल गु्रप के सुरेष बोथरा अनिल संखलेचा, एवं शोभाया़त्रा में सम्पतराज बोथरा, मदन बोथरा, भूरचंद बोहरा, इन्दमल सिघवी मुकेष बोहरा, दिनेष सिंघवी, गौतम सिघवी, वीरचंद भंसाली, भूरचंद संखलेचा, संजय बोहरा सहित कई लोागे ने संभाली। 

दोपहर में कौन बनेगा जैन जीनियस एवं म्यूजिकल चैयर प्रतियोगिता सम्पन्न हुई एवं सांयकालीन आरती सजावट एवं महाआरती महावीर जिनालय पादर मौहल्ला में सम्पन्न हुई। 

इस अवसर जैन श्री संघ के उपाध्यक्ष केवलचंद बोहरा, कोषाध्यक्ष शंकरलाल बोथरा, सहमंत्री रमेष महेता, नाकोड़ा ट्रस्टी रतनलाल बोहरा, रतनलाल संखलेचा, हसंराज कोटडि़या, लूणकरण बोथरा तथा अचलगच्छ जैन संघ के अध्यक्ष वसराज वडेरा, खतरगच्छ जैन संघ के अध्यक्ष मांगीलाल मालू, स्थानक जैन संघ के अध्यक्ष दिनेष लूणिया, कुषलवाटिका के कोषाध्यक्ष बाबुलाल टी बोथरा, तथा जैन श्री संघ के सदस्य भंवरलाल पड़ाईया, जेठमल पड़ाईया, पारसमल छाजेड़, प्रकाषचंद बरडिया, हस्तमील बोहरा, गौतम बोहरा, लूणकरण सिघवी, रतनेष श्रीश्रीमाल, मोहनलाल भंसाली तथा रतनलाल वडेरा, कैलाष कोटडि़या, गौतम चमन, बाबुलाल मालू,, गौतम बोथरा, गौतम बोथरा, महावीर बोहरा सहित हजारो की तादाद में गणमान्य लोग मौजूद रहे। 

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