जेल में बनी भागने की साजिश?
बाड़मेर।
हत्या का आरोपित कंवराराम फरार भले ही न्यायालय परिसर से हुआ, लेकिन उसके भागने की साजिश संभवत: जेल में ही रची गई। अब पुलिस जेल क्षेत्र में उपयोग में लिए सेलफोन की कॉल डिटेल खंगाल रही है और उस संभावित सिमकार्ड तक पहुंचने का प्रयास कर रही है, जो जेल में संभवत: कंवराराम या उसके किसी साथी के पास था। अंदेशा है कि सेलफोन पर ही साजिश रची गई कि पेशी के दिन न्यायालय परिसर से फरार होना है।
बाड़मेर जेल में बंदियों द्वारा सेलफोन का उपयोग करना किसी से भी छिपा हुआ नहीं है। यह बात और है कि अधिकृत तौर पर यह मानने के लिए कोई तैयार नहीं है। जेल में बंदियों की यदा-कदा होने वाली तलाशी के दौरान भी सेलफोन बरामद होने जैसी वास्तविकता कभी नहीं बताई जाती। हत्या के आरोपित के फरार होने के बाद लकीर पीटी जा रही है।
अनौपचारिक बातचीत में हर कोई यही मान रहा है कि जेल में निरूद्ध कंवराराम या उसके किसी साथी पास सेलफोन था, जिसके जरिए उसने जेल से बाहर अपने साथी से सम्पर्क किया। सेलफोन पर ही यह तय कर लिया कि किस रंग की कौनसी गाड़ी न्यायालय परिसर में कहां खड़ी रहेगी। वह किस तरह चालानी गार्ड को चकमा देकर गाड़ी तक पहुंचेगा और गाड़ी में सवार होकर फरार हो जाएगा। सूत्रों का मानना है कि जिस सेलफोन का फरार आरोपित ने उपयोग किया, उस पर संभवत: शुक्रवार रात अधिकाधिक बातचीत हुई और शनिवार सुबह न्यायालय में पेशी होने के बाद साजिश को आसानी से अंजाम तक पहुंचा दिया गया।
सवा तीन वर्ष में सात मामले
बीते सवा तीन वर्ष में कंवराराम के खिलाफ हत्या के एक मामले सहित कुल सात मामले दर्ज हो चुके हैं। उसके पहला मामला 25 सितम्बर 2010 को शहर कोतवाली थाने में दर्ज हुआ। अंतिम मामला भी शनिवार को ही शहर कोतवाली थाने में दर्ज किया गया है। सदर थाने में तीन, गुड़ामालानी व रामसर थाने में एक-एक मामला दर्ज है। हत्या के अलावा जो मामले दर्ज हैं, वे चोरी, नकबजनी, मारपीट, राजकार्य में बाधा से संबंधित है। किसी भी मामले में अभी तक न्यायालय से अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। सभी मामले विचाराधीन है।
दूसरे दिन भी खाली हाथ पुलिस
न्यायालय परिसर से शनिवार को कंवराराम के फरार होने के बाद उसके पीछे लगी पुलिस को दूसरे दिन भी सफलता नहीं मिली। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रघुनाथ गर्ग की निगरानी में शनिवार रात व रविवार को दिन भर पुलिस की पांच विशेष टीमें इस काम में लगी रही। इसके अलावा पड़ौसी जिलों की पुलिस भी अलर्ट रही। फिर भी नतीजा सिफर ही रहा।
प्रयास जारी है
फरार आरोपित को ढूंढने के प्रयास जारी है। पुलिस को जो इनपुट मिल रहे हैं, उसके आधार पर तलाशी अभियान चल रहा है। प्रयासों में कोई कमी है। -रघुनाथ गर्ग, कार्यवाहक पुलिस अधीक्षक बाड़मेर

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