आंकड़ों का मोहताज पर्यटक विभाग
आनंद एम वासु 
जैसलमेर। 
पर्यटक विभाग तरस रहा है आंकड़ों के लिये और होटल्स, गेस्ट हाउस, धर्मषालाओं और अन्य ठहराव वाले संस्थान है कि इस बात को नजरअन्दाज करते जा रहे हैं । पर्यटन विभाग इस बात को गंभीरता से नहीं ले रहा है और जिस दिन आंकड़ों संबंधी फाइल तलब की जायेगी तब पूरा सिस्टम सक्रिय होगा ।
टूरिस्ट एक्ट और सराय एक्ट के तहत ठहरने वाले यात्रियों की सूचना अध्यतन पहुंचानी चाहिए । लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है । पर्यटक विभाग लाचार है । ठहरने वाले यात्रियों की सुचना तत्काल पर्यटक विभाग को पहुंचे ऐसी तकनीकि का इस्तेमाल करना होगा सभी होटल्स, गेस्ट हाउस और धर्मशालाओं में ।
हर साल देश विदेश से लाखों पर्यटक आते हैं तो वे सरकारी आंकड़ों में गिने भी जाते हैं । जिला स्तर पर यह आंकड़े पर्यटक विभाग जारी करता है । पर्यटक विभाग को ये आंकड़े होटल्स, गेस्ट हाउस, धर्मशालाओं और जितने भी ठहराव के स्त्रोत हैं उन्हीं की संख्या के आधार पर एकत्र कर प्रसारित करने होते हैं । यही आंकड़े किन्हीं संदर्भ विशेष में पुष्ट माने जाते हैं । लेकिन इस विभाग का हाल यह है कि उसके पास ये आंकड़े अपडेट इसलिये नहीं हो पाते कि होटल्स, गेस्ट हाउस और अन्य ठहराव वाले स्थानों से उन्हें रोज के आंकडे़ नहीं भेजते हैं । रोज के दूर, मासिक सूचना भी नहीं भेजी जाती है इनके द्वारा ।
हर साल सर्दियों में पर्यटक सीजन अपनी चरम सीमा पर होता है । जुलाई माह में पर्यटक आना शुरू होते हैं जो कि मरू महोत्वव की समाप्ति पर कम होता है । मरू महोत्सव जनवरी-फरवरी माह में आता है । मार्च तक इक्का दुक्का टूरिस्ट बाजार में, गलियों में दिखाई देते हैं । इस तरह मार्च से जून तक के ये चार महिने जैसलमेर को सुनसान कर जाते हैं । फिर जैसे ही जुलाई माह आता है, रौनक शुरू हो जाती है । पर्यटकों की बहार शुरू होती है और यहां के बाशिन्दों के चेहरों की रौनक साफ दिखाई दे जाती है । आखिर इस जिले का एक महत्वपूर्ण उद्योग है, पर्यटन उद्योग । लोगों की रोजी रोटी है यह उद्योग

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