विधानसभा में आखिरी दिन मिटी दूरियां 
जयपुर।
home newsराज्य विधानसभा का 11वां सत्र शुक्रवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। इसे मौजूदा विधानसभा का आखिरी सत्र माना जा रहा है और यही वजह रही कि सत्र समाप्त होते ही सत्ता और प्रतिपक्ष के सभी सदस्यों ने सारी दूरियां मिटा लीं। सभी ने एक-दूसरे को गले मिलकर या हाथ मिलाकर आगामी चुनाव की शुभकामनाएं दी। नए सदस्यों ने वरिष्ठ सदस्यों के पांव छूकर आशीर्वाद लिया। सभी ने एक-दूसरे से अब तक हुई कहासुनी के लिए माफी भी मांगी। हालांकि अंतिम समय में सदन के नेता मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, अध्यक्ष दीपेन्द्र सिंह शेखावत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की कमी जरूर खली।
कार्यवाही खत्म होने से कुछ पल पहले तक जो विधायक एक-दूसरे पर शब्दबाण चला रहे थे, वे कार्यवाही खत्म होते ही भाव विभोर होकर एक-दूसरे की ओर आगे बढ़े। संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल सीधे घनश्याम तिवाड़ी के पास गए और दोनों ने गर्मजोशी से हाथ मिलाए। फिर धारीवाल प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया के पास गए कस कर गले मिले। सरकारी मुख्य सचेतक रघु शर्मा ने किरण माहेश्वरी का अभिवादन किया और कहा, 'आप तो मेरी बड़ी बहन हैं।' शर्मा ने तिवाड़ी के पांव छूकर आर्शीवाद लिया। तिवाड़ी ने भी उनकी पीठ थपथपाई। परिवहन राज्य मंत्री वीरेन्द्र बेनीवाल और राजपाल सिंह शेखावत भी देर तक बतियाते दिखे।

अभिवादन किया
प्रताप सिंह खाचरियावास ने भाटी, तिवाड़ी और कटारिया का अभिवादन किया। भाटी ने रौबिले अंदाज में अलविदा और फिर मिलेंगे कहा। सभापति सुरेन्द्र सिंह जाड़ावत भी अधिकतर सदस्यों से मिलने उनके स्थान तक गए।

हो सकती थीं कड़वी यादें
सदन में एक बार तो कड़वी याद के साथ विदाई का माहौल बन गया था, क्योंकि भाजपा के सदस्य एक बिल के विरोध में बहिष्कार कर वापस आ गए थे, लेकिन ना पक्ष लॉबी में देवी सिंह भाटी ने कहा कि आखिरी दिन इस तरह जाना ठीक नहीं है। मीडिया भी आलोचना करेगा। इस पर सभी सदस्य राजी होकर सदन में लौट गए। 

अनुभव अपने-अपने...
13वीं विधानसभा की सबसे कम 119 दिन बैठक हुई। इससे कम बैठक उसी समय हुई, जब विधानसभा ढाई-ढाई साल ही रही। सदन के नेता की उपस्थिति नगण्य रही। मंत्री भी जवाब देने में कमजोर रहे। कड़वाहट पहले से ज्यादा रही और लोकतांत्रिक मर्यादा किनारे रखे गए। छह कार्यकाल में से इस बार सबसे कम आत्मीयता दिखी। जब हंगामा होता है तो विधायक का सदन से मन भर जाता है, पुराने विधानसभा भवन में बोलने का समय मिलने के कारण रात को दो-दो बजे तक खुश होकर लौटते थे। पहली बार ऎसा रहा कि सभी 200 विधायकों के नाम तक नहीं जान पाए, क्योंकि कट मोशन व प्रश्न लगाए बिना विधायक की पहचान नहीं हो सकती। गुलाब चंद कटारिया, नेता प्रतिपक्ष भाजपा

राज्य विधानसभा में आने का एक सपना देखा था। जो समस्या देखी उनका समाधान कराया।
राजकुमार शर्मा, स्वास्थ्य राज्य मंत्री


बैठक साल में कम से कम 80 होनी चाहिए। नए लोगों को बोलने का कम समय मिला।
हनुमान बेनीवाल, विधायक

सांगानेर की रंगाई-छपाई उद्योगों का मामला गूंजा


विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान शुक्रवार को सांगानेर क्षेत्र के 826 रंगाई-छपाई उद्योगों को बंद करने के लिए दिए कारण बताओ नोटिस का मामला गूंजा। विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए इन उद्योगों को बंद नहीं करने का मुद्दा उठाया। पर्यावरण मंत्री बीना काक ने सदन में आश्वासन दिया कि उद्योगों से पर्यावरण प्रदूषण की समस्या दूर करने के लिए 5 सितम्बर से विभिन्न जिलों में शिविर लगाए जाएंगे। राज्य में करीब 10 हजार औद्योगिक इकाइयों को नोटिस जारी किए गए हैं। जिन इकाइयों को नोटिस मिले हैं, उनके लिए संबंघित अघिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे व्यक्तिगत रूप से प्रकरणों की सुनवाई कर समस्याएं सांगानेर क्षेत्र में 826 उद्योगों को नोटिस जारी किए हैं, जिनमें से 138 इकाइयों तक नोटिस नहीं पहुंचे हैं। इसका कारण उद्योगों के बोर्ड का बदलना और पते सही नहीं होना है।


नेशलन ग्रीन ट्रिव्यूनल एक्ट के अनुसार जो इकाइयां बिना मापदंडों के चल रही हैं, उन्हें बंद किया जाना चाहिए। इससे पहले तिवाड़ी ने कहा कि पर्यावरण बोर्ड प्राकृतिक न्याय के आधार पर निर्णय करे। जल प्रदूषण रोकने को ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए जमीन आवंटन और कलक्टर की अध्यक्षता में समिति का गठन हो चुका है। पांच करोड़ रूपए का प्रावधान भी हो चुका है।

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