परिसंपति निर्माण निधि से होगा पारंपरिक जलस्त्रोतों का पुर्नरूद्वार 

महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत सामग्री मद में 40 फीसदी से अधिक की राशि राज्य मद से उपलब्ध कराने के लिए परिसंपति निर्माण निधि की स्थापना की गई है। इसके तहत महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत सामग्री मद में व्यय की सीमा के कारण अपूर्ण रहने वाले सामुदायिक कार्य विशोशकर पारंपरिक जल स्त्रोतों का पुर्नरूद्वार कराया जा सकेगा। 

बाड़मेर, 30 अप्रैल। 
महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत सामग्री मद में 40 फीसदी व्यय सीमा के कारण अपूर्ण रहने वाले कार्यों को अब परिसंपति निर्माण निधि से पूर्ण कराया जा सकेगा। राज्य सरकार ने वशर 201314 से परिसंपति निर्माण निधि की स्थापना की है। इसके तहत पारंपरिक जल स्त्रोतों के पुर्नरूद्वार एवं सुधार के साथ अधूरे सामुदायिक कार्यों को पूर्ण कराया जाएगा। 

अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी एल.आर.गुगरवाल ने बताया कि राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक परिसंपतियों के निर्माण एवं महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत अपूर्ण कार्यों को,विशोष रूप से परंपरागत जल स्त्रोतों तथा जल संरक्षण एवं जल संचय के कार्य पूर्ण कराने के लिए परिसंपति निर्माण निधि की स्थापना की है। इसके तहत आवश्यक सामग्री मद में 40 प्रतिशत से अधिक की राशि राज्य मद से उपलब्ध कराई जाएगी। परिसंपति निर्माण निधि की स्थापना का उददेश्य पारंपरिक जल स्त्रोतों के पुर्नरूद्वार के साथ अर्ध कुशल एवं कुशल श्रमिकों के लिए रोजगार के अतिरिक्त अवसरों का सृजन करना है। सर्व प्रथम इस निधि से पारंपरिक जल स्त्रोतों के पुर्नरूद्वार एवं सुधार, जल संरक्षण एवं जल संचय के अपूर्ण/ प्रगतिरत कार्यों को पूर्ण कराया जाएगा। इसके उपरांत सभी श्रेणी के अपूर्ण/प्रगतिरत कार्यों को पूर्ण कराया जाएगा। किसी ग्राम पंचायत में यदि एक भी कार्य अपूर्ण नहीं है तो वाशिर्क कार्य योजना में सम्मिलित नये कार्यों को कराया जा सकेगा। वाशिर्क कार्य योजना में सम्मिलित ऐसे नये कार्य प्रथम प्राथमिकता पर पारंपरिक जल स्त्रोतों के पुर्नरूद्वार एवं सुधार तथा द्वितीय प्राथमिकता पर अन्य सामुदायिक कार्य, जिनमें सामग्री लागत 40 प्रतिशत से अधिक है कि स्वीकृति जिला कार्यक्रम समन्वयक द्वारा जारी की सकेगी। परिसंपति निर्माण निधि से उपयोग की जाने वाले राशि की मांग जिला कार्यक्रम समन्वयक को राज्य सरकार से की जाएगी। इस निधि से कराये गये कार्यों की एमआईएस फीडिंग अभिसरण अर्थात कनवर्जेंस के तहत की जाएगी। 

पहले नरेगा से स्वीकृति राशि होगी खर्च: कार्यों के कि्रयान्वयन के दौरान यह ध्यान रखा जाएगा कि सर्वप्रथम महात्मा गांधी नरेगा से देय श्रम, सामग्री की राशि व्यय की जाएगी तथा सामग्री मद की 40 प्रतिशत की सीमा तक व्यय होने के पश्चात कार्य को केवल इस आधार पर बंद नहीं किया जाए कि सामग्री मद पर 40 प्रतिशत की सीमा पूर्ण हो चुकी है। ऐसे कार्यों के लिए सामग्री मद में नरेगा योजनान्तर्गत अनुमत सीमा से अधिक के व्यय को परिसंपति निर्माण निधि से उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए कि्रयान्वयन एजेंसी को इस आशय का प्रमाण पत्र देना होगा कि नरेगा योजना से अनुमत सामग्री मद की राशि का पूर्ण उपयोग कर लिया गया है, उन्हें सामग्री मद में आवश्यक धन राशि उपलब्ध करा दी जाए। 

अधूरे एवं प्रारंभ नहीं होने वाले कार्य शामिलः परिसंपति निर्माण निधि में महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत अपूर्ण/प्रगतिरत एवं वाशिर्क कार्य योजना में शामिल लेकिन प्रारंभ नहीं होने वाले कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण कराया जा सकेगा। 

पेयजल संकट से मिलेगी राहतः परिसंपति निर्माण निधि में जल स्त्रोतों के पुर्नरूद्वार से आम जन को पेयजल संकट से राहत मिलेगी, वहीं कृशि पैदावार में इजाफा होने की संभावना है। 

तीन लाख कार्य प्रगतिरतः राजस्थान में महात्मा गांधी नरेगा योजनान्र्गत गत वशर में 95633 कार्य पूर्ण कराये गये है। जबकि 321667 कार्य प्रगतिरत/अपूर्ण है। अपूर्ण कार्यों में 19859 कार्य जल स्त्रोतों के पुर्नरूद्वार एवं 44804 कार्य जल संरक्षण एवं जल संचय के अपूर्ण है। इन कार्यों को परिसंपति निर्माण निधि में पूर्ण कराने को प्राथमिकता दी जाएगी।

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