रिजर्वेशन पर भी न्यूनतम अंक लाना जरूरी
जयपुर। 
राजस्थान उच्च न्यायालय ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में सरकार में खाली पड़े बैकलॉग पदों पर भर्ती के लिए अनुसूचित जाति एवं जनजाति के सदस्यों का लिखित परीक्षा में अनिवार्य विषयों में न्यूनतम अंक लाना अनिवार्य बताया है। मुख्य न्यायाधिपति अरण मिश्रा एवं न्यायाधिपति एन के जैन की खंडपीठ ने यह आदेश अपीलार्थी महेन्द्र मीणा एवं अन्य की अपील को खारिज करते हुए दिया।
high-court-jaipurमामले के तथ्यों के अनुसार राजस्थान लोक सेवा आयोग ने 9 सितंबर 2008 को लेखाकार,कनिष्ठ लेखाकार एवं तहसील राजस्व लेखाकार के बैक लाग पदों पर राजस्थान अधीनस्थ लेखा सेवाएं नियम 1963 एवं राजस्थान राजस्व अधीनस्थ लेखाकार सेवानियम 1975 के तहत विज्ञप्ति जारी की। याचिकाकर्ता इस प्रतियोगी परीक्षा में 25 जून 2011 को सम्मिलित हुए,19 अक्टूबर 2011 को जब परिणाम घोषित किया गया तो याचिकाकर्ता अनिवार्य विषयों में निर्धारित न्यूनतम अंक(35) नहीं ला पाने की वजह से फेल कर दिए गए।
इस परिणाम को प्रार्थी नरोत्तम मीणा व अन्य ने एकलपीठ में चुनौती दी,इस याचिका को 3 नवम्बर 2011 को खारिज कर दिया गया। इस आदेश को खंडपीठ में चुनौती देकर न्यायालय से अनुरोध किया गया कि राजस्थान अधीनस्थ लेखा सेवाऎं नियम 1963 का नियम-22(जो अनिवार्य विषयों में न्यूनतम अंक प्राप्त होना अनिवार्य करता है) संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 के विरद्ध है और असंवैधानिक है। जबकि वैकल्पिक विषयों में न्यूनतम अंकों की अनिवार्यता नहीं है। वैकल्पिक विषय बुक कीपिंग,एंड एडवान्स एकाउन्टेन्सी,भारतीय अर्थशास्त्र एंड बिजनेस मैथर्ड,ऑडिटिंग एलीमेन्ट ऑफ कोस्ट एकाउन्टिंग में न्यूनतम अंकों से कम अंक प्राप्त होने पर भी उन्हें उत्तीर्ण माना जा सकता है। 
राज्य सरकार ने अपने जवाब में कहा कि नियम 1963 का नियम-22 को प्रभाव में आए हुए पचास वर्ष हो चुके है और इन वर्षो में सारे चयन इस नियम के अंतर्गत ही किए गए है तथा सरकार नियम बनाने में सक्षम है। याचिकाकर्ताओं को इस नियम को चुनौती देने का अधिकार नहीं है। मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने कानून को रद्द करने की प्रार्थना को खारिज कर दिया।

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