जैन विरासत संरक्षण महत्वपूर्ण: आचार्य 

जसोल (बालोतरा) 
तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य महाश्रमण ने भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी की ओर से आयोजित जैन विरासत संरक्षण एवं गुणानुवाद समारोह में अपना मंगल प्रेरणा पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि जैन शासन का विकास व जैन विरासत का संरक्षण महत्वपूर्ण बात है। आचार्य तुलसी व आचार्य महाप्रज्ञ ने भी इसका चिंतन किया था। जैन शासन के पास विद्या का खजाना है। जैन विद्या संस्थानों में जैन विद्या का यथासंभव अध्ययन होना चाहिए। 
जैन समाज को मिले अल्पसंख्यक का दर्जा: आचार्य ने जैन लोगों द्वारा जैन समाज को अल्पसंख्यक बनाने की बात पर कहा कि जैन समाज को अल्पसंख्यक का दर्जा मिलना चाहिए। जैन समाज के हित में जो हो, उस बात का सहयोग होना चाहिए। मंत्री मुनि सुमेरमल ने इस संदर्भ में कहा कि जैन समाज की विरासत व साहित्य का संरक्षण होना चाहिए तथा जैन समाज के बच्चों में भी जैनत्व के संस्कार पुष्ट करने का प्रयास होना चाहिए। साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा ने कहा कि संपूर्ण जैन समाज जैनत्व की सुरक्षा के लिए कटिबद्ध हो। जैनों की जीवनशैली व जैन आचार संहिता लागू हो। 
जैन जीवनशैली हमारे जीवन में उतरे, यह अपेक्षा हो। भारत सरकार के ग्रामीण विकास राज्य मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि जैन दर्शन एक वैज्ञानिक दर्शन है। हमारा समर्पण देव गुुरु धर्म के प्रति होना चाहिए। जैन दर्शन पूरे कल्याण के लिए है। हमें राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक होना चाहिए। कार्यक्रम के अध्यक्ष भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी अध्यक्ष आरके जैन व विशिष्ट अतिथि नरेंद्र बल्दोता ने अपने विचार व्यक्त किए। 
दिगंबर समाज द्वारा आचार्य का अभिनंदन: कार्यक्रम में आचार्य महाश्रमण का भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ सेवा क्षेत्र कमेटी द्वारा एक अभिनंदन पत्र आचार्य का गुणोत्कीर्तन करते हुए भेंट किया गया। अभिनंदन पत्र का वाचन संचालनकर्ता प्रो. नलिन शास्त्री ने किया। भारत सरकार के मंत्री प्रदीप जैन, आर के जैन, नरेंद्र बल्दोता, अशोक जैन, चकेश जैन ने अभिनंदन पत्र आचार्य को भेंट किया। 
समारोह में दिखा जैनत्व: भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन ने सर्वप्रथम गुरुदेव से वार्ता की। बाद में प्रवचन पांडाल में वे मंच पर कुर्सी पर आसीन हुए। थोड़ी देर बाद उन्होंने देखा कि सभी संत गुरुदेव से नीचे आसन पर विराजमान है और मैं कुर्सी पर, तो तुरंत वो बिना आसन के ही कुर्सी से नीचे बैठ गए। 
थोड़ी देर बाद आचार्य के पाथेय से पहले प्रदीप जैन एकदम नीचे श्रद्धालुओं की पंक्ति में आकर बैठ गए। मंत्री की यह सरलता सबके आकर्षण का केंद्र रही। उनके साथ अन्य लोग भी नीचे बैठ गए और मंत्री की धर्मपत्नी भी। कार्यक्रम के प्रारंभ में कार्यक्रम की रूपरेखा प्रो. नलिन शास्त्री ने पेश की। 
प्रवास व्यवस्था समिति के संयोजक गौतम सालेचा ने स्वागत भाषण दिया। जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी द्वारा अल्प संख्यक विषय पर प्रकाशित पुस्तक आचार्य को चक्रेश जैन ने भेंट की। केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन का प्रवास व्यवस्था समिति के संयोजक गौतम सालेचा, अध्यक्ष जसराज बुरड़, महामंत्री शांतिलाल भंसाली ने और आरके जैन का सभाध्यक्ष खूबचंद भंसाली, भंवरलाल भंसाली, कालूराम संकलेचा ने और नरेंद्र बल्दोता का धनराज तातेड़ व रमेश बोहरा ने सम्मान अभिनंदन किया। आभार ज्ञापन अशोक जैन व प्रवास व्यवस्था समिति की ओर से आभार ज्ञापन शांतिलाल भंसाली ने किया। 

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