'यूपीए सरकार भ्रष्टाचार में डूबी है' :ओंकारसिंह लखावत
बाड़मेर.
यूपीए सरकार भ्रष्टाचार में डूबी है। कोयला, 2 जी स्पेक्ट्रम सरीखे के घोटाले सबके सामने हैं। देश की प्रतिष्ठा को दांव पर लगा दिया। यह सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है। महंगाई की बात करें तो रसोई, डीजल के साथ आम आदमी की जरूरत की वस्तुओं के भाव आसमां छू रहे हैं। इस स्थिति में गरीब का जीना मुश्किल हो गया है। यह बात भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष ओंकारसिंह लखावत ने भाजपा जिला कार्यकारिणी की बैठक में कही। लखावत ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि मनमोहनसिंह ने कहा कि पैसे पेड़ों पर नहीं लगते। इस तरह के बयान देकर प्रधानमंत्री जनता के प्रति जिम्मेदारी को भूल रहे हैं। इस दौरान लखावत ने मंडल अध्यक्षों से मंडल बैठकों की तारीखें तय करवाई। हर विधानसभा क्षेत्र में 10-10 वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की टीमें गठित की गई जो बूथ स्तर पर जन जागरण व सभाएं आयोजित करेंगे। इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष मेजर पर्वतसिंह, सिवाना विधायक कानसिंह कोटड़ी, शिव के पूर्व विधायक डॉ. जालमसिंह रावलोत, वरिष्ठ नेता रतनलाल बोहरा, मृदु रेखा चौधरी, पूर्व विधायक तगाराम चौधरी, कैलाश चौधरी, जिला महामंत्री वीरसिंह भाटी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष पहाड़सिंह महेचा, शिव प्रभारी स्वरूपसिंह खारा, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष आशा अग्रवाल, महामंत्री शारदा चौधरी, प्रियंका चौधरी, दौलतसिंह खारा, किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष हमीरसिंह भायल, जिला संयोजक सहकारिता प्रकोष्ठ हिंगोलसिंह, कुंवर तनसिंह सणाऊ, बालाराम मूढ, लक्ष्मी चौधरी, बलवंतसिंह भाटी, जिला प्रवक्ता स्वरूप आचार्य समेत बड़ी तादाद भाजपा कार्यकर्ता मौजूद थे।
सूखाग्रस्त गांवों में चारा, पानी का संकट
बाड़मेर. शिव के पूर्व विधायक डॉ. जालमसिंह रावलोत ने सरहदी गांवों का दौरा कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनी। इस दौरान गांवों में चारा,पानी व रोजगार की समस्याएं सामने आई। रावलोत ने क्षेत्र के हरसाणी, जडिया, तुड़बी, ताणू रावजी मानजी, गोरडिय़ा, खारची, बालेबा, मगरा, जानसिंह की बेरी, दुधोड़ा, सोलंकिया, सालमसिंह की बस्ती, तिबनियार ओनाड़ा समेत कई गांवों का दौरा किया। रावलोत ने बताया कि सरहदी गांवों में अकाल के हालात बने हैं। सरकार ने सूखाग्रस्त घोषित कर दिया, मगर अभी तक चारा,पानी व रोजगार के इंतजाम नहीं किए है। ऐसे में गांवों में पशुओं के अकाल से मरने की नौबत आ गई है। रावलोत ने कहा कि केन्द्रीय अध्ययन दल की रिपोर्ट के बाद भी सरकार की ओर से सूखाग्रस्त क्षेत्र में अकाल राहत के कार्य शुरू नहीं किए जा रहे हैं।
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