मदेरणा को सुनाए अपहरण व हत्या के आरोप
जोधपुर। 
अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण मामलों की विशेष अदालत ने सोमवार को एएनएम भंवरी के अपहरण, हत्या व सबूत मिटाने के मामले में पूर्व मंत्री महीपाल मदेरणा को दोषी ठहराते हुए खुली अदालत में आरोप सुनाए। इसी मामले में एक अन्य आरोपी लूणी विधायक मलखानसिंह विश्नोई को भी आरोप सुनाया जाना तय था, लेकिन जयपुर के फोर्टिस एस्कॉट्र्स अस्पताल में भर्ती होने तथा हर्निया के ऑपरेशन के बाद अन्य कई तरह की व्याधियों से घिर जाने के कारण अदालत में पेश नहीं हो सके। अदालत में विशेष न्यायाधीश गिरीश कुमार शर्मा ने मलखान को आरोप सुनाने के लिए अब 30 अक्टूबर की तिथि तय की है।
गौरतलब है कि भंवरी मामले में अजा-जजा मामलों की विशेष अदालत ने चार्ज बहस पूरी होने के बाद 4 अक्टूबर को सभी 16 आरोपियों पर आरोप तय कर दिए थे। इन में से 14 आरोपियों को उनके आरोप उसी दिन पढ़ कर सुना दिए गए, जबकि मामले के दो अहम आरोपियों पूर्व मंत्री महीपाल मदेरणा के उनकी माता के स्वर्गवास हो जाने के कारण पैतृक गांव जाने के कारण तथा मलखान के जयपुर में फोर्टिस अस्पताल में हर्निया के ऑपरेशन कराए जाने के कारण आरोप नहीं सुनाए जा सके थे। 
सहारा दे कर लाए मदेरणा को
न्यायिक अभिरक्षा में जेल में चिकित्सकों की सलाह पर बेड रेस्ट कर रहे मदेरणा सोमवार को अजा-जजा मामलों की अदालत में उनके पुराने सहयोगी आईदान सिंह हाथ पकड़ कर सहारा देकर लाए। मातृशोक के कारण साफा पहने मदेरणा के साथ उनकी पुत्री दिव्या भी अदालत में पहुंची। 

एस्कॉर्ट का खर्च रोजाना दस हजार
अदालत में मलखान के अधिवक्ता हनुमान खोखर ने आवेदन पेश करते हुए कहा गया कि उनका जयपुर के फोर्टिस अस्पताल में 5 अक्टूबर को ऑपरेशन हुआ है, इस लिए अजमेर जेल से उनके साथ 4 व्यक्तियों की एस्कॉर्ट भेजी गई है जिसका खर्च प्रतिदिन 10 हजार रूप के हिसाब से मलखान से वसूला गया है। अधिवक्ता ने अस्पताल की एक रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि ऑपरेशन के बाद से मलखान को तेज बुखार है, स्लिप डिस्क भी हो गया है। फेफड़ों में पानी भरने की भी शिकायत हो गई है इस लिए उनको अस्पताल में काफी दिन तक रहना पड़ सकता है।

इस लिए अदालत एस्कॉर्ट का खर्च मलखान से वसूल नहीं करे व पूर्व में जमा कराए गए 1 लाख 60 हजार रूपए भी लौटा दें। इस पर अदालत में मौजूद सीबीआई के लोक अभियोजकों एसएस यादव तथा अशोक जोशी ने कहा कि मलखान सरकारी अस्पताल में इलाज क्यों नहीं करवाते। अदालत ने आवेदन पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं किया।

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