"नहीं तो भुगतना पड़ेगा खमियाजा"
नई दिल्ली।
इससे पूर्व शुक्रवार को पहले डीजल और रसोई गैस और एफडीआई पर केन्द्र सरकार ने कड़ा फैसला लेकर ले लिया। एफडीआई पर हुई बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दो टूक कहा कि कड़े फैसले लेने का वक्त आ गया है, उन्हें पता है कि इन फैसलों का कड़ा विरोध होगा लेकिन सरकार को अगर जाना भी पड़ा तो इसके लिए वह तैयार हैं। वे लड़ते हुए जाएंगे। एफडीआई से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
एफडीआई मामले में मनमोहन सिंह ने 2008 की तरह दृढ़ता दिखाई, जब उन्होंने अमरीका के साथ नागरिक परमाणु समझौता पर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की पहली पारी की सरकार के अस्तित्व को दांव पर लगा दिया था। इस फैसले के बाद वामपंथी पार्टियों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था, जिसके बाद सरकार को लोकसभा में विश्वास प्रस्ताव लाना पड़ा और जिसमें सरकार को जीत हासिल हुई थी।
उधर, सरकार की प्रमुख सहयोगी पार्टी टीएमसी की प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा कि वह एफडीआई के सरकार के फैसले का विरोध करेगी। बनर्जी ने केंद्र सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उधर, एनसीपी ने केन्द्र सरकार के इस कदम का समर्थन किया है।द्रमुक प्रमुख एम करूणानिधि ने भी केंद्र सरकार के इस निर्णय की आलोचना करते हुए कहा कि दाम में वृद्धि करने से पहले द्रमुक के साथ विचार विमर्श नहीं किया गया। करूणानिधि ने केन्द्र सरकार से समन्वय समिति की तत्काल बैठक बुलाने की मांग की है। इस मुद्दे पर सरकार से समर्थन वापस लेने के संबंध में पूछे जाने पर करूणानिधि ने कहा कि द्रमुक केन्द्र सरकार को इस तरह की कोई धमकी नहीं देगी।
जनता दल (एस) ने एफडीआई का कड़ा विरोध करते हुए संकेत दिया है कि वह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार को बाहर से अपना समर्थन देना बंद कर देगा। पार्टी के महासचिव दानिश अली ने कहा कि उनकी पार्टी के अलावा समाजवादी पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर मल्टीब्रांड रिटेल सेक्टर में विदेशी पूंजी निवेश पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया।
मालूम हो कि शुक्रवार को आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी की बैठक में मल्टी रिटेल ब्रांड में 51 फीसदी विदेशी निवेश को मंजूरी दी गई। हालांकि सरकार ने राज्य सरकारों पर यह छोड़ दिया है कि वे इस संबंध में मॉडलिटीज को कैसे लागू करते हैं।
मल्टी रिटेल ब्रांड में विदेशी निवेश को लेकर विपक्ष ने भी सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने का फैसला लिया है। एनडीए से जुड़े कई दल और वामपंथी पहले ही इसको लेकर अपना विरोध जता चुके हैं।
भाजपा के महासचिव एवं मुख्य प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने सरकार के इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि संप्रग सरकार भ्रष्टाचार और घोटालों से बुरी तरह घिरी है और उसने जानबूझकर जनता का ध्यान बांटने के लिए यह विवादास्पद फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने हड़बड़ी में यह फैसला लिया है जिसका भाजपा प्रबल और मुखर विरोध करेगी। इस फैसले से पांच करोड़ से अधिक छोटे व्यापारियों की आजीविका और भविष्य पर सवाल खड़ा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विदेशी तत्वों के दबाव में यह फैसला लिया है। सरकार ने संसद में चर्चा के दौरान आश्वासन दिया था कि इस बारे में निर्णय लेने से पहले सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लिया जाएगा लेकिन उसका भी उल्लंघन किया गया है।
मालूम हो कि तृणमूल कांग्रेस ने पहले भी मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई का विरोध किया था। इसके चलते सरकार को फैसले को टालना पड़ा था।
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