अब मंगल मिशन पर इसरो की नजर 
श्री हरिकोटा। 
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अंतरिक्ष अभियानों की शतकीय पारी पूरी करने के बाद अब अपना ध्यान पूरी तरह से अगले वर्ष प्रस्तावित मंगल अभियान पर केन्द्रित कर दिया है। इस अभियान में स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन का इस्तेमाल करने की योजना बनाई जा रही है। 
इसरो के अध्यक्ष डॉ. के.राधाकृष्णन ने सतीश धवन स्पेस सेंटर में फ्रांस एवं जापान के उपग्रहों को लेकर ध्रुवीय अंतरिक्ष प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी सी-21)के सफल प्रक्षेपण के बाद कहा कि अब हम अगले वर्ष प्रस्तावित मंगल अभियान की उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे हैं। 
आसान नहीं है मंगल मिशन
पीएसएलवी-सी-21 प्रक्षेपण इसरो का सौ वां अभियान था,जो सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। मंगल अभियान को लेकर चीन से होड़ की बात का खंडन करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि मंगल का मिशन एक बेहद चुनौतीपूर्ण अभियान होगा जिसके लिए हम नई प्रौद्योगिकी विकसित करेंगे। इसरो विगत दो वर्षो से मंगल अभियान का अध्ययन कर रहा है। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भी हाल ही इस अभियान को अपनी स्वीकृति दे दी थी। 
उपग्रह पर निगरानी रखना बड़ी चुनौती
राधाकृष्णन ने कहा कि मंगल ग्रह का अभियान (चंद्रयान-1) चंद्रमा मिशन की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होगा क्योंकि पृथ्वी की प्रारंभिक कक्षा की तुलना में मंगल ग्रह की कक्षा तक उपग्रह को ले जाने में बहुत लंबी दूरी तय करनी होगी। इसके साथ ही उपग्रह पर निगरानी बनाए रखना भी बड़ी चुनौती होगी। इसरो के सभी केन्द्र क्रायोजेनिक इंजन सहित भू-स्थैतिक अंतरिक्ष प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी)प्रौद्योगिकी को पुख्ता बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसरो मंगल अभियान में स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन के इस्तेमाल की योजना बना रहा ह।

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