पीएम की निगरानी में हैं सोशल मीडिया 
नई दिल्ली। 
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सामाजिक तनाव बढ़ाने में सोशल मीडिया व एसएमएस के इस्तेमाल को सरकार व सुरक्षा बलों के सामने नई चुनौती बताते हुए देश में बढ़ रही साम्प्रदायिक हिंसा व जातीय तनाव पर शनिवार को चिंता जाहिर की। पुलिस बलों के प्रमुखों के तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के अंतिम दिन मनमोहन सिंह ने यह भी चेताया कि देश में साइबर अपराध के खतरे बढ़ रहे हैं। आतंकवाद पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमलों के लिए आतंकी समुद्री मार्ग का इस्तेमाल कर सकते हैं। आतंकवाद से निपटने के लिए समय से पहले ही कदम उठाने होंगे। आतंकी मुंबई, दिल्ली और पुणे में हमले करने में कामयाब रहे हैं।
मनमोहन सिंह ने गुप्तचर ब्यूरो द्वारा आयोजित सम्मेलन में राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और महानिरीक्षकों तथा केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों के महानिदेशकों व महानिरीक्षकों को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर राज्य मंत्री वी. नारायणसामी, मुल्लापल्ली रामचंद्रन और जितेंद्र सिंह मौजूद थे।
मनमोहन सिंह ने कहा कि देश में पिछले कुछ महीनों में साम्प्रदायिक घटनाओं में वृद्धि और पूर्वोत्तर में हाल के सप्ताहों में जातीय तनाव की पुनरावृत्ति हम सभी के लिए खासतौर से चिंता के कारण रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने सुरक्षा बलों के समक्ष खड़ी चुनौतियां गिनाते हुए कहा कि पूर्वोत्तर का जातीय तनाव राष्ट्रव्यापी बन गया, क्योंकि दक्षिण व पश्चिम भारत के विभिन्न शहराें से पूर्वोत्तर के लोगों का पलायन शुरू हो गया। इससे देश के साम्प्रदायिक हालात और बिगड़ गए, जिसके पहले से ही बिगड़ने के कुछ संकेत मिल रहे थे, खासतौर से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल में।
प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ऎसे समय में आई है, जब हाल में असम में हुए जातीय संघर्षो में लगभग 100 लोगों की मौत हो गई थी और दो लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ा था। इसके बाद सोशल मीडिया के जरिए फैलाई गई अफवाहों के बाद पूर्वोत्तर के लोगों का बेंगलूरू, पुणे, मुम्बई और अन्य शहरों से पलायन शुरू हो गया।

मनमोहन ने कहा कि साम्प्रदायिक हालात को बिगाड़ने के लिए बल्क एसएमएस और सोशल मीडिया का इस्तेमाल नई चुनौती है, जिसे हाल के तनावों ने हमारे सामने पेश किया है। हमें इस बात को पूरी तरह समझने की जरूरत है कि ये नए माध्यम उपद्रवियों द्वारा किस तरह इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
मनमोहन ने कहा कि हमें इन नए माध्यमों के जरिए किए जा रहे कुप्रचार का मुकाबला करने के लिए रणनीतियां बनाने की भी जरूरत है। इस तरह के माध्यमों के इस्तेमाल पर नियंत्रण करने के किसी भी उपाय को अभिव्यक्ति व सम्पर्क की आजादी की आवश्यकता से सावधानीपूर्वक तालमेल बिठाना होगा।
हमारे देश में साइबर अपराध के खतरे बढ़ रहे हैं, क्योंकि हमारी अर्थव्यवस्था और महत्वपूर्ण अधोसंरचना कम्प्यूटर नेटवर्क और इंटरनेट पर अत्यधिक निर्भर हो गई है। मनमोहन ने पुलिस प्रमुखों को चेताया कि हमारी महत्वपूर्ण अधोसंरचना और अर्थव्यवस्था पर बड़े पैमाने के कम्प्यूटर हमलों के विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार एक मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचे पर काम कर रही है, जो खतरा प्रबंधन व शमन, आश्वासन व प्रमाणन, क्षमता निर्माण व अनुसंधान के मुद्दे से निपटेगा। इसके लिए हमें सरकार, शैक्षिक समुदाय और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी बनाने की जरूरत है।

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