त्योहारों की सीजन में खूब रूलाएगी महंगाई 
नई दिल्ली।
चालू मानसून सीजन में औसत से कम बारिश हुई है। इससे पैदावार घटने की आशंका है। साथ ही मांग बढ़ने से आने वाले त्योहारी सीजन में चीनी,खाद्य तेल और दलहन जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में 15 प्रतिशत तक का इजाफा हो सकता है। उद्योग संगठन एसोचैम ने एक अध्ययन में कहा कि आने वाले त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में जबदरस्त तेजी का दंश झेलना पड़ सकता है। 
मोटे अनाज,तिलहन की खेती प्रभावित
अध्ययन में कहा गया है कि चालू मानसून सीजन में औसत से करीब 12 प्रतिशत कम बारिश होने से मोटे अनाज और तिलहन की खेती बुरी तरह प्रभावित हुई है। कर्नाटक, महाराष्ट्र,गुजरात और राजस्थान के 390 तालुकाओं को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। एसोचैम के महासचवि डी.एस.रावत ने कहा कि आमतौर पर त्योहारी सीजन जैसे दुर्गा पूजा,दिवाली और क्रिसमस में चीनी,खाद्य तेल,दलहन और दूध की कीमतों में तेजी आती ही है लेकिन इस वर्ष बारिश कम होने से उत्पादन में कमी आने की आशंका से कीमतों में और अधिक की तेजी आने का अनुमान है।

चीनी के उप्तादन में गिरवाट 

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2012-13 में देश में चीनी का उत्पादन ढाई करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया जा रहा है क्योंकि महाराष्ट्र और कर्नाटक में बहुत कम बारिश होने से गन्ने की खेती प्रभावित हुई है। इस वर्ष कर्नाटक में मात्र 38 लाख टन चीनी उत्पादन होने का अनुमान है। हालांकि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद देश के सबसे बडे चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में इस वर्ष 68 लाख टन चीनी उत्पादन की संभावना जताई जा रही है जो पिछले वर्ष के बराबर है। 

बढेंग दूध के दाम 

प्राकृतिक और मानव निर्मित कारकों से दूध और दुग्ध उत्पादों की कीमतों में तेजी आएगी। मानसून के दौरान के आमतौर पर दूध का उत्पादन कम हो जाता है। पिछले एक वर्ष में दूध की कीमतों में 25 प्रतिशत तक की बढोतरी हो चुकी है और अब इसमें अधिक की वृद्धि होने पर खाद्य मुद्रास्फ्ती पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। चारे की कमी और चारे के निर्यात से इसमें आई तेजी भी दूध की कीमते बढाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। दूध की कीमते बढ़ने के साथ ही मक्खन और चीज की कीमतें भी बढेगी। 

15 फीसदी बढ़ सकते हैं तेल के दाम

रिपोर्ट में कहा गया है कि मांग बढने और उत्पादन घटने से पिछले एक वर्ष में देश में खाद्य तेलों की कीमतों में जबदरस्त तेजी आई है। मूंगफली तेल और सरसों तेल में 25 प्रतिशत तक की वृद्धि हो चुकी है। तिहलन की कमी की वजह से कीमतों में यह तेजी अई है। खाद्य तेल कंपनियों को बिस्कुट और स्नैक्स बनाने वाली कंपनियों के साथ रेस्त्रांओं की आने से खाद्य तेलों में तेजी आने की संभावना है। इसकी वजह से खाद्य तेलों की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक की तेजी आ सकती है जबकि छोटे पैकेज में इसकी कीमतों में 25 प्रतिशत तक की बढोतरी होगी। 

कम बारिश की वजह से दलहन की बुआई में कमी की वजह से हाल के महीनों में इनकी कीमतों में 15 प्रतिशत तक की तेजी आ चुकी है। राजस्थान,महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में मूंग की खेती में 50 प्रतिशत तक की कमी आई है। मूंग की कीमतें बढने से अरहर में भी तेजी आई है। पिछले एक महीने में इसकी कीमत 10 रूपए प्रति किलोग्राम तक बढ़ी है। उड़द की कीमत भी इस अवधि में 10 रूपए से लेकर 15 रूपए प्रति किलोग्राम तक बढी है।

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