हिन्दी भाषा सभी गुणों से अलंकृत है - सोढ़ा
झुझुनू,14 सितंबर।
हिन्दी भाषा सभी गुणों से अलंकृत है जिने बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में आसीन हो सकती है। हिन्दी सिर्फ एक भाषा ही नहीं है वह एक सफर भी है। सदियों लम्बा एक ऐसा सफर, जिसे कई पड़ाव है, कई मोड़ है। यह सफर पीढ़ियों ने तय किया है। हिन्दी एक ऐसी नदी की यात्रा है जिसमें हर दिशा से कई तरह की धाराएं मिलती रही है। हिन्दी ने अपने पास आई हर भाषा- बोली की धारा को बेहिचक स्वीकार किया और खुद एक नए रूप में ढलती रही। यह विचार स्थानीय सूचना ेंद्र में हिन्दी दिवस पर आयोजित विचार गोष्ठी में साहित्यकार नरपत सिंह सोढ़ा ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हिन्दी भाषा का भविष्य उज्जवल है। हर व्यिक्त को अभिव्यिक्त े लिए भाषा की आवश्यकता है और जीवन में अभिव्यिक्त े लिए हिन्दी भाषा जरूरी है। हिन्दी भाषा की तासीर अहिंसात्मक है। उन्होंने कहा कि हिन्दी एक समृद्व भाषा है जिसकी गिनती विश्व की तीसरी भाषा में होती है। औद्योगिक विकास होने से हिन्दी भाषा का विकास भी सुदृढ़ होगा। वरिष्ठ पत्रकार राजन चौधरी ने इस अवसर पर कहा कि हिन्दी का आज सौभाग्य यह है कि वह हमारी वर्तमान लोकपि्रय संस्कृति एवं देश े उभरते बाजार का संभवतः सबसे सशक्त और दूर-दूर तक फैला माध्यम है। आधुनिक भारत की लोकपि्रय संस्कृति की अनेक भाषाएं जरूर है लेकिन हिन्दी भाषा उन सभी भाषा-भाषियों को आपस में जोड़ने का माध्यम बन गई है। हिन्दी में सरलीकरण का गुण स्वयं में ही है वह प्रवेश े अनुसार अपने को ढाल रही है। स्वामी दयानंद सरस्वती इस भाषा को आर्य भाषा कहते थे लेकिन बाद में इसे हिन्दी कहा जाने लगा। भारत सरकार े राजभाषा विभाग ने हिन्दी भाषा को प्रोत्साहित करने की पहल की है हम उस पहल को आगे बढ़ाने का संकल्प करे, तो यह हमारी हिन्दी को वह स्थान दिलाने की दिशा में खास प्रयास होगा।
पत्रकार उमेश शर्मा ने कहा कि हर क्षेत्र में हिन्दी भाषा का प्रयोग हो और प्रत्येक व्यिक्त को राष्ट्रभाषा की हिफाजत करनी है। प्रत्येक व्यिक्त हिन्दी भाषा का प्रयोग करने का संकल्प ले। किसी भाषा का विकास उसे बोलने या लिखने वालों पर निर्भर करता है। हिन्दी को यदि चिरजीवी बनाना है तो उसे आम लोगों े लिए ही होना होगा। ऐसी हिन्दी जो आसानी से सबे समझ में आए। हिन्दी की प्रकृति तद्भवपरक है वह कठिन से लगातार सरलता की ओर यात्रा करती है। विचार गोष्ठी में पत्रकार अशोक सिंह शेखावत, उतम जोशी, जितेन्द्र योगाी, अजीत सिंह बिजारणिया, रोश शर्मा, विक्रम मील, रामचन्द्र, नन्दलाल, मोहनसिंह, सुनील मालावत, संदीप वालिया भी मौजूद थे। सहायक जनसम्पकर अधिकारी पूरणमल ने आंगतुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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