सहाय और जायसवाल की होगी छुट्टी!
नई दिल्ली।
केन्द्रीय कोयला मंत्री श्री प्रकाश जायसवाल और पर्यटन मंत्री सुबोध कांत सहाय पर कोयला घोटाले की गाज गिर सकती है। कांग्रेस नेतृत्व दोनों के कार्रवाई करने के मूड में हैं। हालांकि कांग्रेस कोल ब्लॉक्स के आवंटन में अनियमितता की बात से इनकार कर रही है लेकिन जिस तरह से दोनों मंत्रियों का नाम इस मामले में उछला है उससे कांग्रेस खुश नहीं है।
कांग्रेस को लग रहा है कि दोनों को ज्यादा समय तक मंत्री बनाए रखना संभव नहीं है। कहा जा रहा है कि कांग्रेसी सांसद विजय दर्डा,नवीन जिंदल और पूर्व कोयला मंत्री संतोष बागरोडिया पर भी कार्रवाई की जा सकती है। कहा जा रहा है कि सोनिया गांधी सहयोगियों से चर्चा के बाद कार्रवाई कर सकती है। सरकार और संगठन में बड़े पैमाने पर फेरबदल हो
सकता है।
यह है सहाय पर आरोप
सहाय ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर एसकेएस इस्पात एंड पावर को कोल ब्लॉक देने की सिफारिश की थी। पत्र मिलने के अगले दिन ही पीएमओ की अनुशंसा पर कंपनी को दो कोयला ब्लॉक आवंटित कर दिए गए। एसकेएस इस्पात में सुबोध कांत सहाय के भाई सुधीर कांत सहाय डायरेक्टर हैं।
जायसवाल की सफाई से कांग्रेस संतुष्ट नहीं
कांग्रेस नेतृत्व को लगता है कि कोयला मंत्री श्री प्रकाश जायसवाल के पास इन बातों का कोई जवाब नहीं है कि उनके कार्यकाल में कोयला ब्लॉक कैसे आवंटित होते रहे? जायसवाल ने अपनी सफाई में कहा था कि उनके कोयला मंत्री बनने से पहले स्क्रीनिंग कमेटी फैसले से कोल ब्लॉक आवंटित किए गए थे लेकिन कांग्रेस नेतृत्व इससे संतुष्ट नहीं है।
दर्डा का नाम कोलगेट में फंसी जेएलडी एनर्जी से जुड़ा है। जिसमें मनोज जायसवाल को फायदा पहुंचने की बात है। वहीं जिंदल की कंपनी जिंद स्टील एंड पावर लिमिटेड को सस्ता कोयला दिया गया। इसके बदले उनकी कंपनी ने उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली नहीं दी। कांग्रेस इस पर उनसे जवाब मांग सकती है।
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