"महंगाई बढ़ी तो वेतन भी बढ़ा" 
नई दिल्ली। 
डीजल के दाम बढ़ाने व सब्सिडी के सिलेंडरों की संख्या घटाने पर सरकार इस पर सफाई देने व अपना बचाव करने में जुट गई है। वहीं दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने इस मसले पर अजीब बयान देकर जनता का दर्द और बढ़ा दिया। उन्होंने इस बढ़ोतरी का यह कहते हुए बचाव किया कि जब सैलरी बढ़ेगी तो दाम भी बढ़ेंगे। लेकिन गरीब लोगो जो मजदूरी करते उन लोगो के लिए उन्होंने कुछ भी नहीं बोला, उनकी मजदूरी में बढ़ोतरी हो या न हो लेकिन सरकार अपने नारे के मुताबिक नहीं नजर आ रही है .......

सैलरी बढ़ेगी तो दाम भी बढ़ेंगे 
दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने शुक्रवार को अटपटा बयान दिया। उन्होंने इस बढ़ोतरी का यह कहते हुए बचाव किया कि जब सैलरी बढ़ेगी तो दाम भी बढ़ेंगे। शीला ने कहा कि सरकार ने कीमतें बढ़ाने का फैसला मजबूरी में लिया है। शीला ने कहा कि कीमतें बढ़ी हैं तो वेतन-भत्ते भी बढ़े हैं। 
उन्होंने कहा कोई भी सरकार हो किसी भी पार्टी की हो वह इस तरह से दाम नहीं बढ़ाना चाहेगी। लेकिन देखने वाली बात यह है कि कांग्रेस को यह मालूम नहीं है कि कितने फीसदी लोग सरकर नौकरियों पर आश्रित हैं।

मोटेक भी उतरे बचाव में
वहीं योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया भी सरकार का बचाव करते नजर आए। उन्होंने कहा,डीजल में बढ़ोतरी कड़ा फैसला है और आठ प्रतिशत विकास दर हासिल करने के लिए ऎसे और कड़े फैसले किए जाने हैं। यह कहना है योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया का। 
दाम नहीं बढ़ते तो तेल कंपनियां बर्बाद हो जातीं 
मोटेक ने शुक्रवार को एक प्रेस कान्फ्रेंस में कहा कि वैश्विक मंदी देश में आर्थिक विकास को पटरी से उतार रही है। उन्होंने कहा कि तेल कंपनियों को बर्बाद होने से बचाने के लिए सरकार ने डीजल का दाम बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर से पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण हटाने की जरूरत है। लेकिन भारत में ही क्यों बढ़ रहे है ये तेल के भाव।

विकास दर पर नकारात्मक असर पड़ता 
यदि दाम नहीं बढ़ाते तो इसका देश के विकास दर पर नकारात्मक असर पड़ता। सब्सिडी बढ़ती है सरकार दूसरी चीजों पर खर्च नहीं कर सकती है। ऎसे में इस तरह के फैसले लेने पड़ते हैं। उल्लेखनीय है कि सरकार ने गुरूवार को डीजल में पांच रूपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। वहीं रसोई गैस का दाम सीधे बढ़ाने की बजाय सरकार ने सब्सिडी के सिलेंडरों की संख्या घटा दी है।

एलपीजी से 32 हजार करोड़ का घाटा

सरकार तर्क दे रही है कि एलपीजी से 32 हजार करोड़ रूपए का घाटा हो रहा था। अब एक परिवार को साल में सब्सिडी वाले 6 सिलेंडर ही मिलेंगे। इस तरह आम आदमी को इन छह के अलावा हर सिलेंडर के लिए लगभग दोगुनी कीमत 740 से लेकर 775 रूपए तक चुकानी होगी।

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

 
HAFTE KI BAAT © 2013-14. All Rights Reserved.
Top