जल सत्याग्रह के आगे झुकी सरकार 

खंडवा। 
अगर हौसला बुलंद हो तो क्या नहीं हो सकता है। यह साबित कर दिया है मध्य प्रदेश के जल सत्याग्रहियों ने। देश-दुनिया में हुई किरकिरी के बाद आखिरकार मध्य प्रदेश की सरकार को जल सत्याग्रहियों के आगे झुकना ही पड़ा। 
सरकार जल सत्याग्रहियों की सभी मांगों को मानने पर राजी हो गई है। सरकार और जलसत्याग्रहियों के बीच पुर्नवास को लेकर सहमति बन गई है। आंदोलनकारियों का एक दल सोमवार को राजधानी भोपाल पहुंचा। 
उनकी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात हुई। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों के लोगों का पुर्नवास किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने ओंकारेश्व बांध के पानी के स्तर को 189 मीटर तक घटाने पर सहमति जताई है। 
विस्थापितों को जमीन देने पर सहमति
मुख्यमंत्री ने आंदोलनकारियों की मांग पर विचार के लिए एक पांच सदस्यीय समिति गठित करने की बात कही है। समिति अगले तीन महीने में अपनी रिपोर्ट देगी। चौहान ने डूब क्षेत्र में आने वाले किसानों को जमीन देने का भी वादा किया है। जीआरए ने विस्थापितों के पुर्नवास का आदेश दिया था। प्रदर्शनकारियों ने हालांकि इसे आंशिक सफलता बताया है। उनका कहना है कि वे तब तक आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे जब तक बांध के पानी का स्तर नहीं घटाया जाता है। गौरतलब है कि खंडवा में गत 17 दिन से बांध विस्थापितों का जल सत्यग्रह चल रहा है। 
नाक तक पहुंचा पानी 
रविवार शाम 5 से 5.30 बजे के बीच नर्मदा का जलस्तर एकाएक 20 सेंटीमीटर बढ़ गया। इससे पानी जलसत्याग्रहियों के नाक तक आ पहुंचा। नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर समेत आला प्रशासनिक अधिकारियों को फोन पर मामले की जानकारी दी। इसके बाद पानी का बढ़ना रूका और देर रात तक पानी पुराने स्तर पर आया। 
गल रही है त्वचा 
उधर इंदिरा सागर बांध के डूब प्रभावित गांवों के ग्रामीण 12 दिनों से जल सत्याग्रह कर रहे हैं। पानी में रहने से उनके पैर की त्वचा गल रही है और उसमें से खून दिखाई देने लगा है, लेकिन सत्याग्रही अपनी मांगों पर अडिग हैं।
केन्द्रीय दल मिलेगा प्रभावितों से 
सोमवार को भोपाल में कैबिनेट की बैठक होगी। इस बैठक में खण्डवा और हरदा के गांवों में चल रहे जल सत्याग्रह के मसले पर भी चर्चा हो सकती है। इसके अलावा, सांसद अरूण यादव के नेतृत्व में केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय का दल भी प्रभावितों से मिलने घोघलगांव पहंुचेगा। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री वीरप्पा मोइली के निर्देश पर खंडवा आ रहा यह दल प्रभावितों से मिलकर रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपेगा। ऊर्जा मंत्रालय प्रधानमंत्री को स्थिति से अवगत कराया जाएगा। 
नहीं बढ़ाया पानी
हालांकि एनएचडीसी के महाप्रबंधक बीके मिश्रा ने जलस्तर बढ़ाने की बात साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा, एनएचडीसी ने पानी में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की है। जलस्तर पहले की तरह 190.5 मीटर पर बना हुआ है। उन्होंने कहा, हो सकता है कि इंदिरासागर सागर बांध से पानी आने के बाद कुछ समय के लिए उतार-चढ़ाव हुआ हो। 
और उग्र होगा आंदोलन
एनबीए के कार्यकर्ता आलोक अग्रवाल ने बताया कि संगठन सरकार के जवाब का इंतजार कर रहा है, अगर जवाब सकारात्मक नहीं मिलता है तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। आंदोलन के सदस्य अशोक अग्रवाल ने बताया कि सत्याग्रहियों को बाहर निकालने में दोनों मंत्रियों की विफलता को सरकार ने नाक का सवाल बना लिया है। यही कारण है कि पानी का स्तर बढ़ाकर आंदोलन को समाप्त करने की कोशिश की गई। इस तरह की कारस्तानी से सत्याग्रही डिगने वाले नहीं हैं।

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