फिर जगी सरबजीत की रिहाई की उम्मीद 

इस्लामाबाद।
पाकिस्तान की जेल में कैद भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह की रिहाई की उम्मीद फिर से जग गई है। भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने बताया कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सरबजीत के मामले को काफी गंभीरता से लिया है। सरबजीत पिछले दो दशक से पाकिस्तान की जेल में कैद है। उसे बम धमाके के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई है। 
मानवीय आधार पर रिहाई की मांग
कृष्णा ने शुक्रवार को जरदारी के साथ बैठक में सरबजीत के मामले को उठाया था। कृष्णा ने पत्रकारों को बताया कि जरदारी ने सरबजीत के मामले को गंभीरता से लेते हुए अपने दफ्तर के कर्मचारियों को इस मामले की तह तक जाने को कहा है। कृष्णा ने कहा कि इस मामले पर भारत का अप्रोच मानवीय है। खासतौर पर इस बात को ध्यान में रखते हुए कि उसने 20 साल पाकिस्तान की जेल में गुजारे हैं। पाकिस्तान की सरकार को फैसला लेने से पहले सरबजीत की उम्र और स्वास्थ्य को ध्यान में रखना चाहिए।

जरदारी के समक्ष लंबित है दया याचिका
सरबजीत को 1990 में हुए एक ब्लास्ट के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई थी। बम ब्लास्ट में चार लोग मारे गए थे। सरबजीत के परिवार का कहना है कि वह किसान है। वह गलत पहचान का शिकार हुआ है। पाकिस्तान की सरकार के दखल के कारण सरबजीत की फांसी की सजा को टाल दिया गया था। वह फिलहाल लाहौर की कोट लखपत जेल में कैद है। उसने हाल ही में राष्ट्रपति जरदारी के समक्ष दया याचिका दी थी।

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