"मर्जी से नौकरी छोड़ी तो गुजारा भत्ता नहीं"
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा है कि अगर कोई महिला अपनी मर्जी से नौकरी छोड़ती है तो वह पति से गुजारा भत्ता मांगने की अधिकारी नहीं है। यायाधीश प्रतिभा रानी ने एक महिला की याचिका खारिज करते हुए यह फैसला दिया। महिला ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। निचली अदालत ने कहा था कि महिला पढ़ी लिखी है और उसने अपनी मर्जी से नौकरी छोड़ी है इसलिए गुजारा भत्ते की हकदार नहीं है। महिला 50 हजार रूपए महीना कमा रही थी। वह अब भी इतना ही पैसा कमा सकने में सक्षम है। यह कहते हुए निचली अदालत ने बच्चे की देखरेख के लिए दस हजार रूपए प्रति महीना देने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने भी यह व्यवस्था बहाल रखी। महिला ने कोर्ट में दलील दी थी कि वह बतौर अस्सिटेंट मैनेजर एक निजी बीमा कंपनी में काम कर रही थी। अचानक फर्म बेंगलूरू में शिप्ट हो गई। इसलिए उसे नौकरी छोड़नी पड़ी। निचली अदालत ने आदेश दिया था कि बच्चे को समय समय पर पिता से मिलने का आदेश दिया था इसलिए वह बेंगलूरू नहीं गई।
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