और सस्ता हो सकता है होम व कार लोन 
मुंबई।
आने वाले समय में होम और कार लोन और सस्ता हो सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक 18 जून को ब्याज दरों को लेकर नीतिगत समीक्षा करने वाला है। इस दौरान ब्याज दरों में कटौती की जा सकती है। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण ने सोमवार को इसके संकेत दिए हैं। 
विकास दर में गिरावट से बढ़ा दबाव
आरबीआई ने गत अप्रैल में नीतिगत दरों में 50 अंकों की कटौती की थी लेकिन उसके बाद विकास दर में आई तीव्र गिरावट ने उस पर दबाव बढ़ा दिया है। आर्थिक विश्लेषक लगातार यह कह रहे हैं कि पिछली तिमाही में विकास दर के गिरकर 5.3 फीसदी पर आ जाने से नीतिगत दरों में कटौती करना जरूरी हो गया है। इस लिहाज से गोकर्ण के बयान को खासा अहम माना जा रहा है। अगर नीतिगत दरों में और कटौती होती है तो इससे आर्थिक विकास को समर्थन मिलने की उम्मीद बढेगी। 
यह है कारण 
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और आर्थिक विकास दर के गिरने की वजह से आगामी मौद्रिक समीक्षा के दौरान नीतिगत दरों में और कटौती हो सकती है। गोकर्ण ने कहा कि देश की आर्थिक विकास दर के उम्मीद से कम होने और मुद्रास्फीति में गिरावट आने से नीतिगत दरों में कटौती की संभावनाएं बन रही हैं। 
गोकर्ण ने बैंकों के पास पूंजी उपलब्धता के समुचित स्तर पर बने रहने का दावा करते हुए कहा कि रिजर्व बैंक से लेने वाले रिण पर ब्याज दर में कटौती से हालात सुधरे हैं। उन्होंने कहा कि बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी उपलब्ध होने से रिजर्व बैंक को हालात बिगड़ने की स्थिति में बांड खरीदने की सहूलियत मिल जाती है। इसके बावजूद गोकर्ण खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतों,कमजोर रूपए और बढ़ते राजकोषीय घाटे के चलते मुद्रास्फीति की चिंताओं के बरकरार रहने को लेकर आशंकित हैं। 
उन्होंने कहा कि राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखने के लिए बजट में जिन उपायों के संकेत दिये गये थे, वे अब तक नहीं उठाए गए हैं। इसकी वजह से वित्तीय दबाव दिख रहे हैं। हालांकि पहले यही माना जा रहा था कि रिजर्व बैंक अपनी समीक्षा के दौरान ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं करेगा लेकिन बदले हुए हालात में इसकी संभावना बढ़ गई है। सीआरआर में भी कटौती की जा सकती है।

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

 
HAFTE KI BAAT © 2013-14. All Rights Reserved.
Top