कोर्ट से मौत की गुहार
जोधपुर।
बेटे का बाल-विवाह मानने से इनकार करने के बाद जातीय पंचों की ज्यादती से परेशान सालवां कला गांव के चौथाराम गोदारा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मौत को गले लगाने की इजाजत मांगी है। याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के बाद बुधवार को हाईकोर्ट के अवकाशकालीन नरेन्द्र कुमार जैन ने इस मामले में पुलिस कमिश्नर व डांगियावास थानाघिकारी मदन बेनीवाल सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। वहीं, सरकारी अघिवक्ता महिपाल विश्नोई को 8 व 9 जून को होने वाली 21 गांवों की खाप पंचायत के दौरान याचिकाकर्ता के परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।क्या है मामला
सालवा कल्लां निवासी चौथाराम के बेटे राजेन्द्र का विवाह 25 दिसम्बर 2006 को मोहनराम की बेटी से हुआ था। शादी के वक्त लड़के की उम्र 16 साल एवं लड़की की 12 वर्ष थी। गत अप्रेल माह में लड़की के घरवालों ने गौने की बात की, तो राजेन्द्र ने बाल विवाह नामंजूर कर दिया। इसके बाद समाज की पंचायत ने दखल करते हुए रिश्ता तोड़ने के एवज में चौथाराम व उसके परिवार पर 6 लाख 25 हजार रूपए का दण्ड लगा दिया। रकम नहीं देने पर परिवादी व उसके परिवार को समाज से बहिष्कृत कर दिया गया। इसके खिलाफ उसने अदालत की शरण ली।
पुलिस ने हटा दी धाराएं
याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश के बावजूद डांगियावास थानाघिकारी ने आरोपी जातीय पचों के खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता की धारा 386 व 394 के तहत प्रकरण दर्ज नहीं किया। पुलिस ने चौथाराम पर जातीय पंचायत से समझौता करने का दबाव डाला।
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