"अश्लील प्रदर्शन के लिए जनता भी दोषी"
लखनऊ।
उन्होंने कहा कि अगर फिल्मों में खराब जबान सुनाई दे रही है तो अच्छी जबान क्या समाज में है। जबान सिमट रही है। नई पीढी का अपनी तहजीब और अपनी जमीन से रिश्ता टूट सा रहा है। आज किसको मुहावरे याद हैं, कौन शायरी सुनता है। मुशायरों में लोग मनोरंजन के लिए जाते हैं।
आज वह समाज है जिसके लिए वे सारी चीजें बेकार हैं जो बैंकों में जमा नहीं हो सकती। आज यह मुमकिन है कि "दो बीघा जमीन" जैसी फिल्में बनाई जाए। उन इलाकों में किसानों के प्रति कोई हमदर्दी है, जहां सिनेमाघर है। आज का हर व्यक्ति कौन बनेगा करोडपति है। अख्तर को शनिवार को "निशाने गालिब" सम्मान से नवाजा गया।
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