मोदी के लिए जोशी को किया कुर्बान
नई दिल्ली।
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए भाजपा ने जोशी की कुर्बानी कबूल कर ली है। मोदी के चलते राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्यता से इस्तीफा देने वाले संजय जोशी को भाजपा ही छोड़नी पड़ी। जोशी ने पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी को अपना इस्तीफा भेजा,जिसे स्वीकार कर लिया है। भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने जोशी के भाजपा से इस्तीफे की पुष्टि की है। जावडेकर ने कहा कि जोशी ने सभी जिम्मेदारियों से मुक्त करने की बात कही थी। पार्टी ने उनकी बात मान ली है। हालांकि जावडेकर ने जोशी के इस्तीफे की वजह नहीं बताई। पहले थी प्रभारी पद से इस्तीफे की खबर
इससे पहले खबर थी कि जोशी ने यूपी के प्रभारी पद से इस्तीफा दिया है। खुद जोशी ने कहा था कि मोदी के कारण उन्होंने यूपी के प्रभारी पद से इस्तीफा दे दिया है। मोदी ने पार्टी छोड़ने की धमकी दी थी। मैंने पार्टी के हित में यह फैसला लिया है। जोशी ने साफ किया था कि उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया है।
मोदी के कारण जोशी ने पहले पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्या से इस्तीफा दे दिया था। जोशी के इस्तीफा के बाद मोदी मुंबई में हुई भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल हुए थे। मोदी ने जोशी को हटाने का दबाव बनाने के लिए गडकरी को अपना इस्तीफा भेज दिया था। यह इस्तीफा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से पहले भेजा था। मोदी का इस्तीफा मिलते ही भाजपा में हड़कंप मच गया। दिल्ली में गडकरी ने आपात बैठक बुलाई। इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी भी शामिल हुए। पार्टी ने फैसला किया कि जोशी को इस्तीफा दे देना चाहिए।
जोशी गडकरी के करीबी माने जाते हैं। जब गडकरी भाजपा अध्यक्ष बने थे तब उन्होंने जोशी को यूपी का प्रभारी बनाया था। जोशी से नाराज मोदी ने यूपी विधानसभा चुनाव में प्रचार करने से इनकार कर दिया था। संजय जोशी मूलत: महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। मैकेनिकल इंजीनियरिंग के पढ़ाई के बाद वे संघ से जुड़े। जोशी संघ के प्रचारक बने। 1990 में जोशी महाराष्ट्र से गुजरात आ गए। 1995 में उन्हें गुजरात का प्रभारी बनाया गया। जोशी 13 साल तक गुजरात में रहे। 2001 में मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद दोनों के बीच खटपट हो गई। इसके चलते जोशी को दिल्ली बुला लिया गया। उन्हें पार्टी महासचिव बनाया गया। सेक्स सीडी के कारण उनको भाजपा से अलग होना पड़ा था।
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