टैक्सटाइल उद्योग का निकला दम
जोधपुर। ग्वारगम के बेतहाशा बढ़ते भावों ने टैक्सटाइल्स उद्योग का दम निकाल दिया है। हालात इतने विकट हैं कि 30 फीसदी टैक्सटाइल इकाइयों में रंगाई-छपाई का काम बंद हो गया और श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं। संभाग के पाली जिले में संचालित टैक्सटाइल मार्केट भी प्रभावित है।
कपड़े को प्रिंट करने में उपयोगी
टैक्सटाइलस से जुड़े उद्यमी बताते हैं कि जोधपुर में गम पाउडर से रोजाना 7-9 लाख मीटर कपड़ा पिं्रट होता है। यानी रोजाना तीन से साढे तीन टन ग्वारगम का पाउडर उपयोग में लिया जा रहा है। पहले एक टन ग्वारगम की कीमत 50 हजार रूपए थी, जो अब बढ़कर 10 लाख रूपए प्रति टन हो गई है। दामों में बीस प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी हो गई है।
तीस फीसदी फैक्ट्रियां बंद
-ग्वारगम में आई तेजी से प्रति मीटर कपड़े की रंगाई में तीस से चालीस फीसदी दाम बढ़ गए हैं। न तो ज्यादा माल आ रहा है और न ही जा रहा है। करीब तीस फीसदी फैक्ट्रियों में रंगाई-छपाई का काम बंद हो गया है।
अशोक बाहेती, अध्यक्ष, जोधपुर टैक्सटाइल हैण्ड प्रोसेसर्स एसोसिएशन
नहीं मिल रहे नए ऑर्डर
-दो महीने पहले तक प्रति मीटर कपड़े की प्रिंट में तीस-चालीस पैसे का ग्वारगम पाउडर उपयोग होता था, लेकिन अब यह चार रूपए प्रति मीटर उपयोग हो रहा है। इससे पिं्रटिंग महंगी हो गई। एक्सपोर्टर यह रेट नहीं दे पा रहे हैं। उद्यमी ऑर्डर पूरे नहीं कर पा रहे हैं और नए ऑर्डर भी नहीं मिल रहे हैं। जोधपुर में साठ फीसदी यूनिटों में प्रिंटिंग कार्य बंद हो गया है। इससे श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं।
उमेश लीला, अध्यक्ष, मरूधरा इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन
-ग्वारगम के भावों से पाली का टैक्सटाइल मार्केट भी काफी प्रभावित है। उद्यमी को प्रिंटिंग के बाद कोई मुनाफा नहीं मिल पा रहा है। फैक्ट्री चलानी है इसलिए इस काम में लगे हैं। प्रिंटिंग रेट 10-15 फीसदी तक बढ़ गई है।
विनय बम्ब, सचिव, राजस्थान टैक्सटाइलस हैण्ड प्रोसेसर्स एसोसिएशन, पाली
ट्रांसपोर्ट पर पड़ा है माल
-इस समय मात्र पचास फीसदी ही माल ट्रांसपोर्ट हो रहा है। उद्यमियों का माल ट्रांसपोर्ट पर पड़ा है। टैक्सटाइल मार्केट कमजोर होने से छोटे ट्रांसपोर्ट पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा है। कई में तो बिल्कुल ही काम नहीं हो रहा है।
सतवीर सिंह चौधरी, नवकार कैरी कॉर्पोरेशन
राजेश दीक्षित
ग्वार और गम के भाव को लगे पंख
वायदा कारोबार पर रोक लगने के बावजूद ग्वार और ग्वार गम के भाव सातवें आसमान पर पहुंच रहे हैं। इसका नतीजा है कि दो-तीन वष्ाü पहले दो हजार रूपए क्विंटल की दर से बिकने वाला ग्वार इन दिनों बाजार में 25 हजार रूपए क्विंटल तक पहुंच गया है। जबकि ग्वारगम के भाव एक लाख रूपए प्रति क्विंटल के करीब हैं। इसके पीछे देश-विदेश में ग्वार का वायदा कारोबार होना और विदेश में बढ़ती मांग माना जा रहा है। सरकार ने ग्वार व ग्वार गम के वायदा कारोबार पर रोक लगा कर बढ़ते भावों पर लगाम लगाने की कोशिश की, लेकिन उसका भी कोई असर बाजार पर नजर नहीं आ रहा।
यहां बढ़ी मांग
ग्वारगम की सबसे ज्यादा मांग व खपत अमरीका में होती है। दो वर्ष पहले अमरीका में ग्वारगम की मांग 50 हजार टन प्रतिवष्ाü थी। यह मांग बढ़कर अब 4 लाख 50 हजार टन प्रतिवर्ष तक पहुंच चुकी है। ज्यादा खपत के बावजूद अमरीका व अन्य कई देशों में ग्वार का उत्पादन नगण्य है। इस कारण भारतीय ग्वारगम की मांग इन देशों में लगातार बढ़ रही है। भारत से अमरीका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, चीन व अन्य देशों में प्रतिवष्ाü करीब 3.50 लाख टन ग्वारगम का निर्यात किया जाता है।
70 फीसदी राजस्थान में उत्पादन
देश में ग्वार के कुल उत्पादन का 70 फीसदी ग्वार का उत्पादन राजस्थान में किया जाता है। राजस्थान के बाद हरियाणा व गुजरात ग्वार उत्पादन करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है।
इसलिए है महत्वपूर्ण
ग्वार के बीज ग्वारगम बनता है। ग्वारगम टैक्सटाइल उद्योग, कागज उद्योग, खाद्य पदार्थ, वार्निश, पेन्ट, पटाखा, पट्रोल कुएं खोदने के संबंधित कार्य सहित बनाने सहित करीब 50 आद्यौगिक कार्यो में इसका उपयोग किया जाता है।
रजनीश अग्रवाल
जोधपुर। ग्वारगम के बेतहाशा बढ़ते भावों ने टैक्सटाइल्स उद्योग का दम निकाल दिया है। हालात इतने विकट हैं कि 30 फीसदी टैक्सटाइल इकाइयों में रंगाई-छपाई का काम बंद हो गया और श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं। संभाग के पाली जिले में संचालित टैक्सटाइल मार्केट भी प्रभावित है।
कपड़े को प्रिंट करने में उपयोगी
टैक्सटाइलस से जुड़े उद्यमी बताते हैं कि जोधपुर में गम पाउडर से रोजाना 7-9 लाख मीटर कपड़ा पिं्रट होता है। यानी रोजाना तीन से साढे तीन टन ग्वारगम का पाउडर उपयोग में लिया जा रहा है। पहले एक टन ग्वारगम की कीमत 50 हजार रूपए थी, जो अब बढ़कर 10 लाख रूपए प्रति टन हो गई है। दामों में बीस प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी हो गई है।
तीस फीसदी फैक्ट्रियां बंद
-ग्वारगम में आई तेजी से प्रति मीटर कपड़े की रंगाई में तीस से चालीस फीसदी दाम बढ़ गए हैं। न तो ज्यादा माल आ रहा है और न ही जा रहा है। करीब तीस फीसदी फैक्ट्रियों में रंगाई-छपाई का काम बंद हो गया है।
अशोक बाहेती, अध्यक्ष, जोधपुर टैक्सटाइल हैण्ड प्रोसेसर्स एसोसिएशन
नहीं मिल रहे नए ऑर्डर
-दो महीने पहले तक प्रति मीटर कपड़े की प्रिंट में तीस-चालीस पैसे का ग्वारगम पाउडर उपयोग होता था, लेकिन अब यह चार रूपए प्रति मीटर उपयोग हो रहा है। इससे पिं्रटिंग महंगी हो गई। एक्सपोर्टर यह रेट नहीं दे पा रहे हैं। उद्यमी ऑर्डर पूरे नहीं कर पा रहे हैं और नए ऑर्डर भी नहीं मिल रहे हैं। जोधपुर में साठ फीसदी यूनिटों में प्रिंटिंग कार्य बंद हो गया है। इससे श्रमिक बेरोजगार हो गए हैं।
उमेश लीला, अध्यक्ष, मरूधरा इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन
-ग्वारगम के भावों से पाली का टैक्सटाइल मार्केट भी काफी प्रभावित है। उद्यमी को प्रिंटिंग के बाद कोई मुनाफा नहीं मिल पा रहा है। फैक्ट्री चलानी है इसलिए इस काम में लगे हैं। प्रिंटिंग रेट 10-15 फीसदी तक बढ़ गई है।
विनय बम्ब, सचिव, राजस्थान टैक्सटाइलस हैण्ड प्रोसेसर्स एसोसिएशन, पाली
ट्रांसपोर्ट पर पड़ा है माल
-इस समय मात्र पचास फीसदी ही माल ट्रांसपोर्ट हो रहा है। उद्यमियों का माल ट्रांसपोर्ट पर पड़ा है। टैक्सटाइल मार्केट कमजोर होने से छोटे ट्रांसपोर्ट पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा है। कई में तो बिल्कुल ही काम नहीं हो रहा है।
सतवीर सिंह चौधरी, नवकार कैरी कॉर्पोरेशन
राजेश दीक्षित
ग्वार और गम के भाव को लगे पंख
वायदा कारोबार पर रोक लगने के बावजूद ग्वार और ग्वार गम के भाव सातवें आसमान पर पहुंच रहे हैं। इसका नतीजा है कि दो-तीन वष्ाü पहले दो हजार रूपए क्विंटल की दर से बिकने वाला ग्वार इन दिनों बाजार में 25 हजार रूपए क्विंटल तक पहुंच गया है। जबकि ग्वारगम के भाव एक लाख रूपए प्रति क्विंटल के करीब हैं। इसके पीछे देश-विदेश में ग्वार का वायदा कारोबार होना और विदेश में बढ़ती मांग माना जा रहा है। सरकार ने ग्वार व ग्वार गम के वायदा कारोबार पर रोक लगा कर बढ़ते भावों पर लगाम लगाने की कोशिश की, लेकिन उसका भी कोई असर बाजार पर नजर नहीं आ रहा।
यहां बढ़ी मांग
ग्वारगम की सबसे ज्यादा मांग व खपत अमरीका में होती है। दो वर्ष पहले अमरीका में ग्वारगम की मांग 50 हजार टन प्रतिवष्ाü थी। यह मांग बढ़कर अब 4 लाख 50 हजार टन प्रतिवर्ष तक पहुंच चुकी है। ज्यादा खपत के बावजूद अमरीका व अन्य कई देशों में ग्वार का उत्पादन नगण्य है। इस कारण भारतीय ग्वारगम की मांग इन देशों में लगातार बढ़ रही है। भारत से अमरीका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, चीन व अन्य देशों में प्रतिवष्ाü करीब 3.50 लाख टन ग्वारगम का निर्यात किया जाता है।
70 फीसदी राजस्थान में उत्पादन
देश में ग्वार के कुल उत्पादन का 70 फीसदी ग्वार का उत्पादन राजस्थान में किया जाता है। राजस्थान के बाद हरियाणा व गुजरात ग्वार उत्पादन करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है।
इसलिए है महत्वपूर्ण
ग्वार के बीज ग्वारगम बनता है। ग्वारगम टैक्सटाइल उद्योग, कागज उद्योग, खाद्य पदार्थ, वार्निश, पेन्ट, पटाखा, पट्रोल कुएं खोदने के संबंधित कार्य सहित बनाने सहित करीब 50 आद्यौगिक कार्यो में इसका उपयोग किया जाता है।
रजनीश अग्रवाल

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