घटने लगा लाल पत्थर का क्रेज
पोकरण विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना चुका पोकरण का लाल पत्थर इन दिनों घरों से लुप्त हो गया है। लाल पत्थर से बनी प्राचीन हवेलियों तथा नक्काशीदार झार झरोखों पर इन दिनों जैसलमेर का पीला पत्थर हावी होता दिखाई दे रहा है। ऐसे में शहरवासियों द्वारा भी भवन निर्माण में लाल पत्थर की जगह जैसलमेर के पीले पत्थर का उपयोग किया जा रहा है। शहरवासियों द्वारा भवन निर्माण में प्राचीन लाल पत्थर मात्र ढांचा खड़ा करने के उपयोग में आ रहा है। वहीं लाल पत्थर की बिक्री भी इन दिनों 20 प्रतिशत ही रह गई है। रीको इंडस्ट्रीज एरिया में स्थित इकाइयों में भी जैसलमेर पत्थर की डिमांड बढ़ रही है। 
2.40 करोड़ से घटकर हुआ 80 लाख : दस वर्ष पूर्व पत्थर की छोटी मोटी इकाइयों में लाल पत्थर की डिमांड थी। वहीं कई इकाइयों पर नक्काशीदार लाल पत्थर की बिक्री भी जमकर होती थी। लेकिन मशीनी युग आने के साथ साथ नक्काशी के उपयोग में आने वाले इस लाल पत्थर की डिमांड भी घट गई। लाल पत्थर के बड़े ब्लॉक नहीं मिलने के कारण व्यापारियों को इनकी कटाई में अत्यधिक आर्थिक नुकसान होने लगा। जिसके चलते व्यापारियों ने जैसलमेर के पीले पत्थर का उपयोग लेना शुरू कर दिया। ऐसे में जहां लाल पत्थर की प्रति वर्ष 2.40 करोड़ की बिक्री होती थी वहीं घटकर यह बिक्री अब मात्र 80 लाख रुपए तक आ गई। सीमित खदानों के कारण हटा मोह: लाल पत्थर की सीमित खदान होने के कारण व्यापारी वर्ग का इस लाल पत्थर से मोह हटने लगा है। इन खदानों में पत्थर के बड़े ब्लॉक नहीं निकलने के कारण व्यापारी वर्ग को इसकी कटाई में परेशानी हो रही है। लाल पत्थर के ब्लॉक नहीं निकलने के कारण व्यापारी वर्ग का जैसलमेर, जोधपुर तथा बालेसर के पत्थरों की ओर रूझान बढ़ रहा है। वहीं हाल ही में जैसलमेर के पत्थर की डिमांड बढऩे लगी है।  
यह कमियां पड़ रही हैं भारी
लाल पत्थर के ब्लॉक में जगह जगह दरारें पाई जाती है। जिससे उसका खनन नहीं हो पा रहा है। आकार में छोटी माइन्स स्वीकृत होने के कारण लाल पत्थर का उपयोग कम हो रहा है। ञ्चअत्यधिक पानी में लाल पत्थर गलना शुरू हो जाता है। खदानों में बड़े ब्लॉक नहीं मिलने के कारण व्यापारियों को अत्यधिक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। लाल पत्थर अत्यधिक मुलायम होने के कारण जल्दी खराब होने का डर रहता है। 

रेत के जमाव के कारण यह लाल पत्थर की खदानें बनी है। यह लाल पत्थर लम्बे समय तक उपयोग में लेने पर यह गलना शुरू हो जाता है। ऐसे में मकान को मजबूती प्रदान करने के लिए शहरवासियों द्वारा जैसलमेर पत्थर का उपयोग लिया जा रहा है। 
डॉ. नारायणसिंह इणखिंया, भू जल वैज्ञानिक, जैसलमेर 

लाल पत्थर की पर्याप्त खदान नहीं है। जिसके कारण यहां पर लाल पत्थर के बड़े ब्लॉक नहीं निकल पा रहे हैं। ऐसे में इन पत्थरों की कटाई भी काफी महंगी पड़ती है। जिसके चलते व्यापारी वर्ग का जैसलमेर के प्रति रूझान बढ़ता जा रहा है। 
रमेश टावरी, पत्थर व्यवसायी, 

लाल पत्थर के ब्लॉक नहीं निकल पा रहे हैं वहीं दूसरी ओर लाल पत्थर के ब्लॉक में दरार आने से यह किसी भी काम का नहीं रहता है। जिसके चलते लोगोंं द्वारा इन दिनों जैसलमेरी पत्थर की डिमांड की जा रही है। देवीसिंह, पत्थर व्यवसायी, 

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