संत श्री पीपाजी महाराज की जयंती पर निकली शोभायात्रा
बाड़मेर जिले में संत श्री पीपाजी महाराज की जयंती पर शोभायात्रा निकली, 'जीव मार जौहर करे, खाता करे बखाण। पीपा परतख देख ले, थाळी मायं मसाण।' श्री पीपाक्षत्रिय समाज की ओर से जयंती के अवसर पर निकाली गई शोभायात्रा में कुछ ऐसे ही संदेश गूंज रहे थे। तलवार की जगह सुई हाथ में लेकर शांति के दूत और अहिंसा के प्रतीक संत शिरोमणि संत श्री पीपानंदाचार्य महाराज की 689 वीं जयंती शुक्रवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। वहीं मंदिर में मंगला आरती, यज्ञ, महाप्रसाद का भी आयोजन किया गया। मंगला आरती से जयंती समारोह की शुरुआत:सरदारपुरा स्थित श्री पीपाजी महाराज मंदिर को विशेष तौर पर सजाया गया। शुक्रवार सुबह पुजारी लक्ष्मीनारायण जोशी ने द्वारकाधीश भगवान व संत श्री पीपाजी के निज मंदिर में मंगला आरती की। इसके बाद महाप्रसाद, यज्ञ, चंवर ढोलना व घुड़सवारों की बोलियां संपन्न होने के बाद विधायक मेवाराम जैन समेत समाज के प्रबुद्धजनों ने श्री पीपाजी महाराज का उद्घोष लगाकर शोभायात्रा को रवाना किया। शांति का दिया संदेश: शोभायात्रा में 'एक दो तीन चार, श्री पीपाजी की जय-जयकार...' जयघोष करते बच्चे, सनातन धर्म की ध्वजा लिए दो घुड़सवार, धर्ममय स्वर लहरिया बिखेरता बैंड दल व ढोल की थाप पर झूमते युवा सबसे आगे चल रहे थे। इसके बाद श्री पीपानंदाचार्य महाराज व भगवान द्वारकाधीश भगवान की चित्रात्मक झांकियां तथा श्रीराम की रामेश्वरम पूजा, सिंह पर सवार जगदंबा माता, विष्णु भगवान की पूजा करते श्री पीपाजी, राक्षस हरण व श्रीकृष्ण की बाललीला की झांकियां आमजन को अलग-अलग देवताओं के दर्शन करवा रही थी। यहां से गुजरी शोभायात्रा: मंदिर से रवाना होकर राय कॉलोनी रोड, विवेकानंद चौराहा, अहिंसा सर्किल, स्टेशन रोड से ईला बाजार, जवाहर चौक, प्रतापजी की प्रोल से होते हुए हनुमान मंदिर, पनघट रोड, तनसिंह सर्किल से वापस मंदिर पहुंची। जहां सभी महिला-पुरुषों को महाप्रसाद वितरण किया गया। शाम को मंदिर में यज्ञ का आयोजन हुआ। यज्ञ में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दी गई।


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