भूजल स्तर गिरने से बढ़ी है चिंता: मिश्रा
भूमिगत जल स्तर तेजी से गिरता जा रहा है। यदि इसी तेजी से जल स्तर गिरा तो उपकरणों की सहायता से भी जल नहीं निकलेगा। वर्तमान में जल संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बहुत जरूरी है। उक्त बात जल संरक्षण व पानी के उपयोग को लेकर मंगलवार को बाड़मेर पंचायत सभागार में जन स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग,सी सी डी यू ,जाग्रर्ति जन सेवा संस्थान नागोर द्वारा आयोजित कार्यशाला में भूजल विभाग के अधिशाषी अभियंता आर .के. मिश्रा ने कही। कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल के प्रति शासकीय विभागों एवं पंचायती राज संस्था के सदस्यों को संवेदनशील करने के साथ गिरते भूजल पर सोच को गंभीर करना था। जल एवं स्वछता मिशन राजस्थान सरकार , पेयजल गुणवता मिशन सी सी डी यू के आई ई सी कंसल्टेंट अशोक सिंह ऩे बताया कि राज्य भर में पानी के मुद्दे पर सरकार गंभीरता से प्रयास कर रही है और हर जगह की अवाम को इस मुद्दे से जोड़ रही है उसी क्रम में बाड़मेर जिले में जन स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग,सी सी डी यू ,जागर्ति जन सेवा संस्थान नागोर द्वारा हर ब्लाक पर भूजल के विषय पर कार्यशालाओ का आयोजन किया जा रहा हें जिसकी शुरुवात बाड़मेर ब्लोक से मंगलवार को हुई. कार्यशाला को संबोधित करते हुए कार्यशाला समन्वयक भूजल विभाग के अधिशाषी अभियंता आर . के. मिश्रा ने कहा कि जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। जल संरक्षण में सामान्य जनमानस का सहयोग जरूरी है। ग्राम पंचायत में विद्युत प्रदाय बंद होने पर जल संकट का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण अंचलों में हैंडपंपों व कुओं के आसपास सफाई रखना चाहिए। ग्रामीण पेयजल स्रोतों के पास ही कपड़े धोते व पशुओं को पानी पिलाते हैं।इस मोके पर भूजल विभाग के भूजल वैज्ञानिक ए पी माथुर ने बताया कि पुनर्भरण योजना अंतर्गत स्टॉपडेम, तालाब, गड्े व रोक बाँध आदि बनाकर जल का पुनर्भरण किया जा सकता है। ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में वर्षाकाल में छत के पानी को भूमि में पहुँचाकर भूमिगत जलस्तर ब़ाना होगा। जन स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग जयराम ने बताया कि कई हिस्सों में पेयजल का उपयोग सिंचाई के लिए किया जा रहा है। इससे कई स्थानों पर पेयजल संकट ब़ रहा है। जल के उपयोग को लेकर ग्रामीणों में जागरूकता ब़ानी होगी। कार्यशाला में जल विशेषज्ञों ने बताया कि अप्रैल 2009 में लागू हुए राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम में मानदंडों का निर्धारण किया गया है। इसके अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को 3 लीटर पेयजल, 5 लीटर खाना बनाने, स्नान के लिए 15 लीटर, घर धोने के लिए 7 लीटर व शौच के लिए 10 लीटर पानी दिया जाना है। आज जेसा भूजल दोहन जारी रहा तो 15 साल बाद तो और भी भयावह हालात होंगे। वैज्ञानिकों ने बताया कि बाड़मेर के कई क्षेत्र डार्क जोन में आता है। इसके बावजूद हम 138 फीसदी भूजल का दोहन कर रहे हैं। इसकी तुलना में भूजल पुनर्भरण नहीं हो रहा। चेतावनी दी गई है कि भूजल संरक्षण पर गंभीरता नहीं बरती, तो 15 साल बाद भूजल भंडार ही खत्म हो जाएंगे। जल संग्रहण जरूरी है। इसके लिए बारिश के पानी को व्यर्थ बहने से रोकने के साथ फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाना होगा। सभी को जागरूक होकर पानी बचाना होगा। कार्यशाला पेयजल गुणवत्ता का महत्व एवं पेयजल प्रदूषण से होने वाले रोग, पेयजल स्त्रोतो को प्रदूषणों को मुक्त रखने के उपायों, ग्राम पेयजल सुरक्षा आदि पर चर्चा हुई।
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