तेज धूप और गर्मी से हाल बेहाल 
चैत्र माह बीतने के साथ ही बाड़मेर जिले में गर्मी व तेज धूप से लोगों के हाल बेहाल हैं। गर्मी के कारण नागरिकों की दिनचर्या में भी बदलाव आने लगा है। तेज धूप के चलते दोपहर के समय तो सड़क आग उगने लगती है, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। शहर में दूरदराज के गांवों से आने वाले लोग अपने कार्य निपटा कर हरे पेड़ों की छांव में सुस्ताते दिखे। 
वैसे तो चैत्र माह के द्वितीय सप्ताह में ही शहर में गर्मी ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए थे, लेकिन वर्तमान में तो सुबह से ही सूर्यदेव अपना प्रकोप दिखाने लग गए हैं। ऐसे में लोग यह आशंका जता रहे हैं कि अभी से गर्मी व धूप की यह स्थिति है तो आगामी मई व जून में क्या होगा? गर्मी के तीखे और असहनीय तेवरों को देखकर कई लोग तो अभी से सावधानियां बरतने लगे हैं। इसके लिए कई ने तो अपनी दिनचर्या भी बदल दी है। 
पनघट लगाने की तैयारियां 
गर्मी में पानी की महत्ता सबसे अधिक रहती है। इसके लिए गांवों के विभिन्न मार्गों पर कई नागरिकों ने पुण्य के लिए अस्थाई रूप से प्याऊ लगवाने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। हर साल गर्मी के समय राहगीरों को पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए अस्थाई रूप से पनघट लगवाए जाते हैं। हाल ही में जिले की नजदीक के गावो में  जाने वाले मार्गों पर तो अस्थाई पनघट लगवा दिए गए हैं।
ठंडे पदार्थों की बढ़ी मांग 
गर्मी शुरू होते ही शहर सहित आसपास के गांवों में शीतल पेय पदार्थों की मांग बढ़ गई है। होटलों, ढाबों पर शीतल पेय पदार्थ की बिक्री शुरू हो गई है। लस्सी, दही की बिक्री अधिक होने से दूध की मांग भी अब बढ़ गई है। बस स्टैंड, बाजार स्थित सब्जी मंडी व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर गन्ना जूस, नींबू, आइसक्रीम, पोदीना शर्बत की हाथ लॉरियां व ठेले भी बाजार में दिखाई देने लगे हैं। मौसम में अचानक आए बदलाव के बाद नागरिकों ने अपने खान-पान में भी बदलाव किया है। सलाद, हरी सब्जियां, शीतल पेयजल, शर्बत, लस्सी, दही, छाछ, आइसक्रीम आदि की मांग बढ़ गई है। शहर के दुकानदारों ने गर्मी शुरू होते ही अपनी दिनचर्या में बदलाव के साथ प्रतिष्ठान खोलने एवं बंद करने का समय भी बदल दिया है। सर्दी के दौरान बाजार में पहले रात करीब आठ-नौ बजे ही प्रतिष्ठान बंद हो जाते थे, लेकिन गर्मी के शुरू होते ही रात को दस-ग्यारह बजे तक प्रतिष्ठान खुले रहते हैं। वहीं अधिकांश व्यक्तियों के खान-पान के अलावा सुबह-शाम एवं दोपहर के समय क्रमश: सोने, उठने व विश्राम करने के समय में भी परिर्वतन आया है। 

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