टीम अन्ना पर निंदा प्रस्ताव आज संभव
नई दिल्ली। विपक्षी राजनीतिक दलों का समर्थन पाकर सरकार पर दबाव बनाने में सफल रही टीम अन्ना का सांसदों से टकराव का दांव उल्टा पड़ गया। रविवार को जंतर-मंतर पर एकत्रित भीड़ के सामने संसद और सांसदों को घेर रही टीम अन्ना अब न सिर्फ अकेली पड़ गई है बल्कि चौतरफा घिर गई है। सोमवार को लोकसभा में इसका स्पष्ट नजारा देखने को मिला। पहली बार लोकसभा में एक सुर से उनकी निंदा हुई और दायरे में रहने की चेतावनी भी दे दी गई। संभावना है कि मंगलवार को जदयू की ओर से निंदा प्रस्ताव लाकर उन्हें इसका अहसास करा दिया जाएगा कि राजनीतिक समर्थन के बिना उनके लिए कुछ हासिल करना संभव नहीं होगा।जंतर-मंतर पर भीड़ की तालियों ने टीम अन्ना का उत्साह भले ही बढ़ाया हो, लेकिन आगे का रास्ता उनके लिए कठिन होगा। पिछले एक साल में यह पहली बार देखने को मिला जब सोमवार को टीम अन्ना का संसद में कोई दोस्त नहीं था। न भाजपा, न जदयू, न सपा और न ही वामदल। टीम अन्ना का बयान और आचरण दोनों आलोचना के घेरे में था और पूरा सदन एकजुट। रविवार को टीम अन्ना के सदस्यों ने कहा था कि हत्या, बलात्कार जैसे गंभीर आरोपों से घिरे 162 सांसद हैं। उन्होंने कुछ नेताओं के चित्र भी दिखाए थे और कहा था 'चोर की दाढ़ी में तिनका'।सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही इसकी प्रतिक्रिया दिखी। लोकसभा में जदयू और सपा के सांसदों ने अध्यक्ष की मेज तक जाकर इसका विरोध किया। बाद में अवसर मिलने पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज, जदयू अध्यक्ष शरद यादव, कांग्रेस सदस्य संजय निरूपम, माकपा नेता वासुदेव आचार्य जैसे कई नेताओं ने टीम अन्ना के आचरण पर नाराजगी जताई। सुषमा और शरद ने अन्ना को याद दिलाया कि जन लोकपाल पर समर्थन के लिए उन्होंने साथ मांगा था। कई बार टीम अन्ना उनके घर तक आई और समर्थन मांगा। अन्ना जेल में बंद किए गए तो सरकार को विपक्षी दलों ने कदम उठाने के लिए मजबूर किया। लेकिन अब उल्टा उन्हें ही निशाना बनाया जा रहा है। लोकप्रियता के लिए संसद पर आशंका जताई जा रही है और सांसदों को गालियां दी जा रही है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।
पूरी हुई कांग्रेस की मुराद
लोकपाल पर लड़ाई टीम अन्ना बनाम संप्रग होने से हलकान कांग्रेस को सोमवार को बड़ी राहत मिली। टीम अन्ना ने 'अति उत्साह' में मुख्य विपक्ष राजग को भड़का कर राजनीतिक दलों को एक कर दिया। सोमवार को लोकसभा में भाजपा नेतृत्व वाले राजग ने टीम अन्ना की खबर लेकर मानों कांग्रेस के मन की मुराद पूरी कर दी। कांग्रेस ने भी टीम अन्ना के हल्केपन के खिलाफ हो रही इस सियासी लामबंदी के मौके को लपकने में जरा देर नहीं की है। लोकपाल विधेयक को पारित कराने की दिशा में तेजी दिखाते हुए टीम अन्ना की भाषा और उनके रवैये पर कठोर प्रहार किए हैं।
जंतर-मंतर पर टीम अन्ना के रवैये को बेहद गैरजिम्मेदाराना करार देते हुए संसदीय कार्यमंत्री पवन बंसल ने कहा कि यह व्यवहार कतई स्वीकार्य नहीं है। जहां तक सरकार की बात है तो वह लोकपाल पारित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस कड़ी में वह यह याद दिलाना नहीं भूले कि पिछले दिनों प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक बहुत अच्छे माहौल में हुई थी। प्रधानमंत्री के वादे के मुताबिक, बजट सत्रावकाश के बीच इन 20 दिनों में संशोधित विधेयक का मसविदा तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने टीम अन्ना की भाषा और रवैये पर गहरी आपत्ति जताई। उन्होंने संकेतों में टीम अन्ना के आंदोलन के पीछे विदेशी हाथ होने की धारणा को आगे बढ़ाया और कहा कि वह संस्थाओं को इस कदर बदनाम और उनके प्रति अनादर दिखा रहे हैं कि पड़ोसी देशों जैसा अस्थिर माहौल बना देंगे। विरोधाभास तो यह है कि वे खुद मानते हैं कि किसी के पास सुबूत नहीं है, लेकिन फिर भी नेता भ्रष्ट हैं। यह तो लोकतंत्र या किसी भी व्यवस्था को न मानने वाला अड़ियल रुख है। सिंघवी ने साथ में चेतावनी भी दी कि 'यदि संसद अपने विशेषाधिकार का प्रयोग नहीं कर रही है तो किसी को यह नहीं मानना चाहिए कि वह कमजोर है।'
बोलकर गलती नहीं की, संसद चाहे तो सजा दे: केजरीवाल
संसद और सांसदों को ले कर दिए गए अपने बयान पर पक्ष-विपक्ष सभी पार्टियों की तीखी आलोचना झेलने के बावजूद टीम अन्ना के प्रमुख सदस्य अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा कि वह अपने बयान पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि संसद की कमी को दिखाने वाला गुनहगार नहीं, बल्कि संसद को इस हाल तक पहुंचाने वाले दोषी हैं। फिर भी अगर उन्हें सजा दी जाती है, तो इसके लिए वह तैयार हैं।
केजरीवाल ने सांसदों के बारे में अपने बयान को सही ठहराते हुए सोमवार को फिर कहा कि यह एक तथ्य है कि इस संसद में 163 लोग ऐसे बैठे हैं, जिनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं। इनमें अनेक के खिलाफ हत्या, अपहरण, बलात्कार और दूसरे संगीन आरोप हैं। इसे कहने वाला संसद का अपमान नहीं कर रहा बल्कि ऐसे लोगों के संसद में होने से संसद का अपमान हो रहा है। केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने यह मसला इसलिए उठाया है क्योंकि उनके मन में संसद के प्रति बहुत सम्मान है।
टीम अन्ना की ओर से रविवार को संसद में चली बहस की रिकार्डिग दिखा कर 'चोर की दाढ़ी में तिनका' मुहावरे का इस्तेमाल करने को भी उन्होंने गलत नहीं माना। उन्होंने कहा कि यह कोई भी जान सकता है कि सख्त लोकपाल बिल के खिलाफ कौन बोल रहा है। ऐसी स्थिति के लिए इस मुहावरे का इस्तेमाल बिल्कुल गलत नहीं है। सभी पार्टियों के सांसद इस पर तो इतने व्याकुल हो गए लेकिन उन्होंने महिला आरक्षण बिल और लोकपाल बिल को फाड़े जाने पर कोई चिंता नहीं जताई। केंद्रीय मंत्रियों के खिलाफ बिना सुबूत आरोप लगाने के बारे में केजरीवाल ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में इन ताकतवर लोगों के खिलाफ कोई आरोप साबित हो ही नहीं सकता। इसलिए वे स्वतंत्र और सशक्त लोकपाल बिल की मांग कर रहे हैं।

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