मुझे की गई रिश्वत की पेशकश: सेनाध्यक्ष
सुप्रीम कोर्ट में सरकार के हाथों उम्र विवाद में मात खाने के बाद से सेनाध्यक्ष लगातार सरकार के सामने एक के बाद एक मुसीबत खड़ी करते जा रहे हैं। सेनाध्यक्ष द्वारा असम राइफल्स के मुखिया के तौर पर लेफ्टिनेंट जनरल एके चौधरी नियुक्ति करने पर भी विवाद हुआ। रक्षा मंत्रालय ने इस नियुक्ति पर रोक लगा दी। इसके बाद जनरल वीके सिंह ने एक हथियार लॉबिस्ट की ओर से 14 करोड़ रुपये की रिश्वत की पेशकश की बात उजागर कर फिर नया बवंडर खड़ा कर दिया है।जनरल वीके सिंह के बयान से सकते में आए रक्षा मंत्रालय ने मामले में सीबीआई जांच के आदेश दे दिए हैं। इस रहस्योद्घाटन पर संसद में हुए हंगामे के बाद रक्षा मंत्री ने जांच एजेंसी से जल्द से जल्द इसके सभी पहलुओं की तह तलाशने के लिए कहा है।सेना प्रमुख ने एक साक्षात्कार में यह बताया था कि सेना से हाल में सेवानिवृत्त एक अधिकारी और हथियार लॉबिस्ट ने उन्हें 14 करोड़ रुपये की रिश्वत का प्रस्ताव दिया था। सेनाध्यक्ष के मुताबिक एक खास कंपनी के वाहन खरीद की मंजूरी पर रिश्वत की पेशकश करने वाले लॉबिस्ट का कहना था कि आपसे पहले भी लोगों ने पैसे लिए हैं और आने वाले भी लेंगे। हालांकि सेना प्रमुख ने न तो रिश्वत की पेशकश करने वाले का नाम उजागर किया और न ही घटना की तारीख के बारे में बताया।कयास लगाए जा रहे हैं कि इस संदर्भ में उनका इशारा डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के पूर्व महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल तेजिंदर सिंह की ओर है जिनका नाम बीते दिनों कथित मोबाइल फोन टैपिंग की खबरों पर आए सेना मुख्यालय के स्पष्टीकरण में भी था।पांच मार्च को जारी इस बयान में सेना मुख्यालय ने सिंह पर अन्य आरोपों के साथ रक्षा उपक्रम भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड को वाहन सप्लाई करने वाली कंपनी टेंट्रा एंड वेट्रा की पैरवी में रिश्वत देने का भी आरोप लगाया था। सेना की ओर से आए आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए तेजिंदर सिंह का कहना है कि वो मामले में कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं।दूसरी ओर रक्षा मंत्री एके एंटनी को मामले की जानकारी को लेकर सेनाध्यक्ष और मंत्रालय के दावों में विसंगति सामने आ रही है। जनरल सिंह के अनुसार उन्होंने मामले की जानकारी रक्षामंत्री एके एंटनी को दी थी जिसके बाद मंत्रालय के मुखिया का कहना था कि ऐसे लोगों को दूर रखने की जरूरत है। जबकि मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक मामले को लेकर सेना प्रमुख ने रक्षामंत्री से बातचीत में उल्लेख किया था। लेकिन रक्षा मंत्री के आग्रह के बावजूद मंत्रालय को इस बाबत कोई लिखित रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई थी। अन्यथा मामले की जांच के आदेश पहले ही दे दिए जाते।
सूत्र बताते हैं कि सेना प्रमुख के दावे को लेकर सदन की कार्रवाई स्थगित होने के बाद रक्षा मंत्री एके एंटनी ने कुछ ही मिनटों में सीबीआई जांच के आदेश दे दिए। वहीं सीबीआई प्रवक्ता के अनुसार रक्षा मंत्रालय से इस संबंध में पत्र प्राप्त हो गया है जिसका अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद ही यह तय हो पाएगा कि मामले में सीधे एफआइआर दर्ज कर जांच शुरु की जाए या फिर प्रारंभिक जांच जरूरी होगी। इस बीच रक्षा मंत्रालय ने सेना के पास मौजूद टेट्रा वाहनों की गुणवत्ता पर भी संतोष जताया है। मंत्रालय की संयुक्त सचिव रश्मि वर्मा के मुताबिक टेट्रा वाहनों की गुणवत्ता पर कोई शिकायत नहीं है। इनकी सर्विसिंग से जुड़े कुछ मामले हैं जिन्हें बीईएमएल देख रहा है।

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