फ्रिक्वेंसी घटी तो करोड़ों का चूना!
अधिक बिजली खरीदने वाले राज्यों पर नकेल कसने के लिए केन्द्रीय विद्युत नियामक आयेाग ने नई व्यवस्था लागू कर दी है। इसके अनुसार ग्रिड से निर्घारण से अधिक बिजली लेने पर यूनिट के हिसाब से अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा। ऎसे में आने वाले समय में यदि राजस्थान ने बिजली का इंतजाम नहीं किया तो उसे करोड़ों रूपए बिजली खरीदने में ही खर्च करने पड़ सकते हैं। प्रदेश को उत्तरी ग्रिड से 18 रूपए प्रति यूनिट तक बिजली खरीदनी पड़ सकती है।
यहां से मिलती है बिजली
राजस्थान सहित देश के एक दर्जन राज्यों को उत्तरी ग्रिड से बिजली मिलती है। अन्तरराष्ट्रीय संस्था "फिच रेटिंग" की राज्यों में बिजली क्षेत्र की स्थिति को लेकर विशेष रिपोर्ट जारी की है। इसमें बताया गया कि बिजली उत्पादन में राजस्थान की स्थिति बहुत दयनीय है। राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश, बिहार, तमिलनाडु और उत्तरप्रदेश की बिजली कम्पनियां घाटे से दबती जा रही है।
अब यह रहेगी मानक फ्रिक्वेंसी
केन्द्रीय विद्युत नियामक आयेाग ने राज्यों की बिजली उत्पादन में विकट स्थिति को देखते हुए निर्घारित क्षमता से अधिक खरीद होने पर बिजली महंगी करने का निर्णय किया है। अब तक मानक फ्रिक्वेंसी स्तर 49.7 किलो हट्र्ज था। अब केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग ने इसे बढ़ाकर फ्रिक्वेंसी मानक 49.8 किलो हट्र्ज कर दिया है। गत वर्ष भी राजस्थान में फ्रिक्वेंसी 49.5 से 49.2 किलो हट्र्ज के बीच आ गई। ऎसे में एक साल तक जोधपुर, अजमेर और जयपुर डिस्कॉम ने शहरों से लेकर गांवों से तीन से 12 घंटे तक बिजली कटौती की थी।
क्या है फ्रिक्वेंसी
बिजली के लोड बढ़ने या घटने के पैमाने को फ्रिक्वेंसी कहते हैं। लोड बढ़ने पर फ्रिक्वेंसी घटती और लोड घटने पर इसमें वृद्धि होती है।
यह रहेगी अब फ्रिक्वेंसी दर (राशि रूपए प्रति यूनिट)
फ्रिक्वेंसी पहले अब
49.80 से 49.82 3.10 4.50
49.68 से 49.70 4.03 7.99
49.50 से 49.20 तक 12.22 12.60
49.2 से नीचे 17.46 18.00
कंट्रोल कर लेंगे
फ्रिक्वेंसी कम होने पर बिजली की दरें अधिक होने का निर्णय हो चुका है। कोशिश करेंगे कि 49.80 किलोहट्र्ज से कम फ्रिक्वेंसी नहीं हो। बिजली की बचत के लिए सभी कम्पनियों को निर्देश दिए गए हैं।
सीएस चंडालिया निदेशक पावर टे्रडिंग, राजस्थान

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