पार्किग नहीं तो रहिए बे-कार
राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य में वाहनों से बढ़ते प्रदूषण, पार्किंग और यातायात की समस्या से निजात दिलाने के लिए राज्य सरकार को शुक्रवार को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उच्च न्यायालय ने परिवहन विभाग को आदेश दिया कि राज्य सरकार के स्तर पर इस सम्बन्ध में कारगर कार्रवाई होने तक नए चौपहिया व तिपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन वाहनधारक के पास पर्याप्त पार्किüग स्थल होने पर ही किया जाए।
न्यायाधीश गोपालकृष्ण व्यास ने परिवहन सचिव को राज्य में चल रहे चौपहिया वाहनों के दस्तावेज का 31 दिसंबर तक भौतिक सत्यापन करने तथा राज्यभर में आम सड़कों पर बेकार पड़े वाहनों को हटाने को कहा है। न्यायाधीश व्यास ने नागौर में वाहन जब्त होने पर भी रजिस्ट्रेशन करने के मामले में स्वप्रेरणा से यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया।
निष्पक्ष जांच के आदेश
कोर्ट ने नागौर में तस्करी के मामले में पुलिस द्वारा जब्त किए गए नए बोलेरो वाहन का अवैध रूप से रजिस्ट्रेशन करने के मामले तथा बीकानेर के पांचू थाने में दर्ज तस्करी के प्रकरण की निष्पक्ष जांच करने व दोषी कर्मचारियों के विरूद्ध कारगर कार्रवाई करने का आदेश भी दिया।
...पहले अंडरटेकिंग
परिवहन सचिव राज्य के सभी जिला परिवहन अधिकारियों को निर्देश जारी करेंगे कि नए चौपहिया-तिपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन करने से पूर्व वाहन मालिकों से पार्किüग स्थल होने की अंडरटेकिंग ली जाए।
कोर्ट ने यह कहा
गृह सचिव सभी पुलिस अधीक्षकों व कमिश्नर को निर्देश जारी करें कि वे अपने जिलों में 30 फीट से कम चौड़ी सड़क पर चौपहिया व तिपहिया वाहनों की पार्किüग नहीं होने दें।
वाहन मालिक दो माह में वाहनों के लिए पार्किüग की व्यवस्था करें।
उसके बाद सड़कों पर खड़े वाहनों को जब्त कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
सार्वजनिक स्थानों पर पड़े बेकार वाहनों को एक सप्ताह में हटवाएं।
राज्य सरकार एक माह के भीतर इस संबंध में रिपोर्ट पेश करे।

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