जनरल दे सकते हैं इस्‍तीफा
नई दिल्‍ली. आयु विवाद पर सरकार के आदेश को सेवा में रहते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाले थल सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह को अदालत से राहत न मिलने के बाद रक्षा मंत्रालय समेत सभी की निगाहें अब सिंह के अगले कदम पर है। निराशा भरे फैसले के बाद सेना प्रमुख जहां अपनी रणनीति का खुलासा किए बिना एक कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए शुक्रवार तीसरे प्रहर जयपुर पहुंच गए, वहीं रक्षा मंत्री एके एंटनी मामले को लेकर लगातार रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा से संपर्क में हैं।
उम्र विवाद में जंग हार चुके सेनाध्‍यक्ष जरनल विजय कुमार सिंह को लेकर साउथ ब्‍लॉक में यही धारणा हावी हो रही है कि उन्‍हें इस्‍तीफा दे देना चाहिए। उनके कुछ समर्थकों का यह भी मानना है कि जनरल सिंह इस्‍तीफे के विकल्‍प पर विचार भी कर रहे हैं। हालांकि यह बात सभी मान रहे हैं कि पूरे प्रकरण के बाद रक्षा मंत्री एके एंटनी और जनरल सिंह के बीच विश्‍वास के रिश्‍ते को तगड़ा झटका लगा है।
अप्रैल 2010 में जब जनरल सिंह ने सेना की कमान संभाली थी, तब मुख्‍य चुनौती सेना की आंतरिक सेहत को सुधारने और करीब 11 लाख की ताकत वाली सेना को लड़ाकू फौज में तब्‍दील करने की थी। लेकिन अब जब उनके जाने का समय आ रहा है तो वह सेना और सिविल नेतृत्‍व के बीच खटास पैदा करने के लिए याद किए जाएंगे।
सेना के बड़े अफसर भी मानते हैं कि फौज की मजबूती के लिए अब सब कुछ नए सिरे से शुरू करना पड़ेगा। हालांकि सरकार का मानना है कि वह हर खाई भरने में सक्षम है।
सेना प्रमुख के रिटायर होने की तारीख 31 मई है। इसके बाद पूरी संभावना है कि बिक्रम सिंह उनकी जगह लेंगे। पर अगर जनरल सिंह ने इस्‍तीफा देने का विकल्‍प चुना तो सरकार के लिए थोड़ी मुश्किल हो सकती है। वैसे, रक्षा मंत्रालय के शीर्ष पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, एंटनी अब इस मामले में अपनी ओर से किसी तरह की पहल किए बिना वीके सिंह के अगले कदम का इंतजार करेंगे। हालांकि सरकार ने वीके सिंह के इस्तीफे की सूरत में आपात योजना (कंटिंजेंसी प्लान) के विकल्पों पर विचार शुरू कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, यदि वीके सिंह समय से पहले (31 मई) अपना इस्तीफा देते हैं तो सरकार मौजूदा उपसेना प्रमुख ले. जनरल एसके सिंह को 31 मई तक कार्यवाहक सेना प्रमुख के रूप में नामित कर देगी। यदि वीके सिंह अपने पद पर अगले कुछ दिनों तक बने रहते हैं तो उनके उत्तराधिकारी के रूप में पूर्वी कमान के प्रमुख ले. जन बिक्रम सिंह के नाम की घोषणा इस माह के अंत तक कर दी जाएगी। नए सेना प्रमुख के चयन की प्रक्रिया मंत्रालय में पहले से ही जारी है।
यही नहीं रक्षा मंत्रालय की निगाहें पिछले माह के अपने उस आदेश के क्रियान्वयन पर भी टिकी हुई है जिसमें उसने एजी शाखा को जनरल वीके सिंह की जन्म तिथि 10 मई 1950 दर्ज करने की हिदायत दी थी। अब चूंकि सुप्रीम कोर्ट से वीके सिंह की अर्जी वापस हो गई है तो सरकार को उम्मीद है कि एजी शाखा अब उसके निर्देशों का जल्द पालन करेगी। आयु विवाद के अदालती पटाक्षेप के बाद इस मामले में अगले दो दिन काफी महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि रक्षा मंत्री एंटनी 13 को संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा पर जा रहे हैं।
शुक्रवार का दिन साउथ ब्लाक स्थित रक्षा मंत्रालय के लिए काफी गहमागहमी से पूर्ण रहा। रक्षा मंत्री एके एंटनी व रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा की निगाहें जहां अदालत के घटनाक्रम को लेकर आ रही पल पल की खबरों पर थीं वहीं फैसला आने के बाद दोनों कंटिंजेंसी प्लान तैयार करने में जुट गए। बहरहाल दोनों ही खेमे सुप्रीम कोर्ट के घटनाक्रम के बाद एक दूसरे की हर चाल व गतिविधि पर गहरी नजरें जमाए रहे।
अगला सेना प्रमुख कौन?
लेफ्टिनेंट जनरल बिक्रम सिंह दौड़ में सबसे आगे हैं। सबसे वरिष्ठ अधिकारी। अभी ईस्ट आर्मी कमांडर की जिम्मेदारी। 1972 में सिख लाइट इनफेंट्री रेजीमेंट में शामिल। डिफेंस सर्विस स्टाफ कॉलेज वेलिंगटन से ग्रेजुएट। महू और यूएस आर्मी वॉर कॉलेज पेनसिल्वेनिया से हायर कमांड कोर्स। देश में दो मास्टर डिग्री के साथ यूएसए से स्ट्रेटेजिक डिफेंस स्टडीज में भी मास्टर्स। उत्तर पूर्व में इनफेंट्री बटालियन और जम्मू कश्मीर में एलओसी की कमान संभाली। दक्षिण कश्मीर में आरआर सेक्टर और दोबारा जम्मू कश्मीर एलओसी इनफेंट्री डिवीजन की कमान। संयुक्त राष्ट्र के तीन शांति मिशन में थे।
लेकिन कुछ आरोप भी
कश्मीर में फर्जी मुठभेड़ : मार्च 2001 में अनंतनाग में एक ऑपरेशन में फर्जी मुठभेड़। विदेशी आतंकी बताते हुए एक सिविलियन का एनकाउंटर करने का आरोप। एनकाउंटर में बिक्रम सिंह को भी गोली लगी थी। उस समय वे 5 सेक्टर राष्ट्रीय राइफल्स के ब्रिगेडियर थे।
अनुशासनहीनता : जब लेफ्टिनेंट जनरल कांगो में भारतीय शांति सेना के चीफ थे तब उन पर सिपाहियों में अनुशासन बरकरार नहीं रख पाने के आरोप लगे। इस दौरान कुछ सिपाहियों और अफसरों पर स्थानीय अफ्रीकी महिलाओं के साथ अवैध संबंधों के आरोप लगे।
बहू की नागरिकता : एक सांसद ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखा था कि लेफ्टिनेंट जनरल बिक्रम सिंह सेना प्रमुख पद के योग्य नहीं, क्योंकि उनकी बहू पाकिस्तानी मूल की हैं।
दूसरे पायदान पर केटी परनाइक
लेफ्टिनेंट जनरल केटी परनाइक ले.ज. बिक्रम सिंह के बाद सबसे वरिष्ठ। फिलहाल उत्तरी कमान के प्रमुख की जिम्मेदारी। सेना में उनका नाम एक इमानदार और बहादुर अफसर के तौर पर लिया जाता है।
तीसरी संभावना :- यदि सेना प्रमुख 31 मई से पहले पद छोड़ देते हैं तो ऐसी स्थिति में वरिष्ठता के आधार पर ले.जे. एसआर घोष सेना प्रमुख हो सकते हैं। ले.जे. घोष फिलहाल पश्चिमी कमान के प्रमुख हैं। क्‍या हुआ था शुक्रवार को थलसेना प्रमुख जनरल वीके सिंह के बहुचर्चित आयु विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के फैसले को सही ठहराया। पौने दो घंटे की मैराथन बहस के बाद कहा कि जनरल सिंह के प्रति मामले में कोई पूर्वाग्रह नहीं बरता गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जन्मतिथि 10 मई 1950 मानने की अपनी पुरानी प्रतिबद्धता से जनरल मुकर नहीं सकते। इसके बाद जनरल वीके सिंह के वकीलों ने अपनी याचिका वापस ले ली। कोर्ट के फैसले के बाद जनरल वीके सिंह अब अपने पूर्व निर्धारित कार्यकाल को पूरा करके आगामी 31 मई को सेवानिवृत हो जाएंगे। 30 दिसंबर का आदेश वापस : शुक्रवार सुबह साढ़े 11 बजे मामले की सुनवाई शुरू होते ही अटार्नी जनरल ने वीके सिंह की वैधानिक अर्जी खारिज किए जाने के 30 दिसंबर के आदेश को वापस लेने पर सहमति जताई। लेकिन साथ ही कहा कि इस संबंध में 21 व 22 जुलाई के आदेश कायम रहेंगे।

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