तीन साल बाद ऐसा संयोग
सोमवार भगवान शिवजी का विशेष प्रिय दिन माना जाता है। इस बार 20 फरवरी को सोमवार और महाशिवरात्रि का सुखद संयोग बन रहा है। पंडितों के अनुसार तीन साल पहले 2009 में सोमवार को महाशिवरात्रि आई थी। अब अगला संयोग 2016 में बनेगा। 20 फरवरी को सूर्योदय पूर्व से ही चतुर्दशी तिथि (जिसके स्वामी शिवजी हैं) शुरू हो जाएगी जो अर्धरात्रि के बाद 3.51 बजे तक रहेगी। पं. अरविंद पंड्या के अनुसार सोमवार को शिवोपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है। सभी मनोरथ पूर्ण होंगे और शिवजी की विशेष कृपा प्राप्त होगी।
अभीष्ट सिद्धि की प्राप्ति
पंडितों के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी पर चंद्रमा सूर्य के नजदीक होता है। ऐसे में जीवनरूपी चंद्रमा का मनरूपी सूर्य के साथ मिलन होता है। अत: सोमवार और शिवरात्रि के संयोग पर शिव पूजा करने से अभीष्ट सिद्धि की प्राप्ति होती है।
शिवजी बनेंगे दूल्हा, पार्वतीजी दुल्हन
महाशिवरात्रि पर परदेशीपुरा स्थित शिवधाम में शिव-पार्वती विवाह होगा। शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए खास व्यवस्थाएं की जाएंगी। मंदिर के संचालक राजेश विजयवर्गीय ने बताया मंदिर में आकर्षक श्रंगार और महाआरती की जाएगी। पार्थिव शिवलिंग पूजन भी होगा। उधर, भूतेश्वर महादेव मंदिर में रुद्राभिषेक होगा। इसके अलावा शहरभर के शिव मंदिरों में शिवजी का आकर्षक श्रंगार किया जाएगा।
यह करना चाहिए
- शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक।
- ओम् नम: शिवाय का जप के साथ रात्रि जागरण।
- शिवलिंग पर आंकड़े के फूल, भांग-धतूरा, बिल्वपत्र, केसरयुक्त चंदन आदि के साथ पूजन सामग्री अर्पित करना चाहिए। सूखे मेवे का भोग लगाना चाहिए।
- चार प्रहर की पूजा करना चाहिए। इसमें अर्धरात्रि को महानिशाकाल में शिवपूजन का विशेष महत्व है।
सोमवार भगवान शिवजी का विशेष प्रिय दिन माना जाता है। इस बार 20 फरवरी को सोमवार और महाशिवरात्रि का सुखद संयोग बन रहा है। पंडितों के अनुसार तीन साल पहले 2009 में सोमवार को महाशिवरात्रि आई थी। अब अगला संयोग 2016 में बनेगा। 20 फरवरी को सूर्योदय पूर्व से ही चतुर्दशी तिथि (जिसके स्वामी शिवजी हैं) शुरू हो जाएगी जो अर्धरात्रि के बाद 3.51 बजे तक रहेगी। पं. अरविंद पंड्या के अनुसार सोमवार को शिवोपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है। सभी मनोरथ पूर्ण होंगे और शिवजी की विशेष कृपा प्राप्त होगी।
अभीष्ट सिद्धि की प्राप्ति
पंडितों के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी पर चंद्रमा सूर्य के नजदीक होता है। ऐसे में जीवनरूपी चंद्रमा का मनरूपी सूर्य के साथ मिलन होता है। अत: सोमवार और शिवरात्रि के संयोग पर शिव पूजा करने से अभीष्ट सिद्धि की प्राप्ति होती है।
शिवजी बनेंगे दूल्हा, पार्वतीजी दुल्हन
महाशिवरात्रि पर परदेशीपुरा स्थित शिवधाम में शिव-पार्वती विवाह होगा। शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए खास व्यवस्थाएं की जाएंगी। मंदिर के संचालक राजेश विजयवर्गीय ने बताया मंदिर में आकर्षक श्रंगार और महाआरती की जाएगी। पार्थिव शिवलिंग पूजन भी होगा। उधर, भूतेश्वर महादेव मंदिर में रुद्राभिषेक होगा। इसके अलावा शहरभर के शिव मंदिरों में शिवजी का आकर्षक श्रंगार किया जाएगा।
यह करना चाहिए
- शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक।
- ओम् नम: शिवाय का जप के साथ रात्रि जागरण।
- शिवलिंग पर आंकड़े के फूल, भांग-धतूरा, बिल्वपत्र, केसरयुक्त चंदन आदि के साथ पूजन सामग्री अर्पित करना चाहिए। सूखे मेवे का भोग लगाना चाहिए।
- चार प्रहर की पूजा करना चाहिए। इसमें अर्धरात्रि को महानिशाकाल में शिवपूजन का विशेष महत्व है।

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