पूरी दुनिया खिची चली आई सम में
रेत के समुन्दर में उमडा जन संस्कृति का महाकुंभजैसलमेंर, 7 फरवरी/भारत वर्ष की पश्चमी सरहद पर रेत के महासागर में मंगलवार की साझ दुनिया के किसी महात्सव से कम नही थी जहॉ दूर-दूर तक पसरी हुई रेत के धोरे से टकराकर लोक संस्कृति के रंगों व रसों के दरिया उफनते रहे न सिर्फ भारत वर्ष अपितु दुनिया के कई मुल्कौं के पर्यटकों की भारी जमावडे के बीच धोरे रंगीन हो उठें।अन्तर्राष्ट्रीय ख्याती प्राप्त मरु महोत्सव के तीसरे व अन्तिम दिन सम के धोरों पर हुए रंगांरग व रोचक कार्यक्रमों ने हजारों सैलानियों को आनन्द के सागर में डूबते उतरते हुए सूरज ने खासा सुकन दिया। मिलों तक फिजाओं में लोक संस्कृति की अनूठी गंध फैलाई। जैसलमेंर जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर रेते के धोरों की धरती सम के मखमली व लहरदार धोरे हर किसी को इतनी भा गए की। इन्हें बरसों तक नही भुलाया जाएगा। पूरे सम क्षेत्रा में लोकप्रिय धोरों पर जनगंगा उमड आई।जैसलमेंर से सम तक पूरा रास्ता विभिन्न प्रकारों के वाहनों की श्रृखला से अटा रहा और दोपहर बाद सम की ओर पहुचनें का दौर निरन्तर जारी रहा। तीन दिवसीय मरु महोत्सव के अन्तिम कार्यक्रम के रुप में सम के धोरों पर मंगलवार की साझ हुए आकर्षित कार्यक्रमों ने चारों ओर लोक मंगल का जबरदस्त उत्साह व उल्लास बिखेरा और लगा जैसे माध पूनम की साझ को पूरी की पूरी दूनिया सम का आनन्द लेने में मस्त हो। सम के धोरों पर देशी विदेशी सैलानियों ने रेगिस्तानी जहाज ऊँट की सवारी करते हुए गजब का आनन्द लिया और डेजर्ट सफारी ने रोमाच भर दिया।मंगल की साझ और सम के धोरे पर दूर दूर से आए सैलानियों को ताजगी और उर्जा का एहसास दिलाते रहे और ठण्डी हवाओं के हौले हौले आनन्द के महासागर में गोते लगाता रहा। शाम को जहॉ उटों की दौड खासी आकर्षक रही वही रेत के धारों पर आसमान में उडने ंवाले पंतगों ने बेहद आनन्द लिया।सूर्यास्त के समय सैलानी समुदाय धोंरो से होकर अस्त होते सूरज को देखने और सनसेट के नजारों में मग्न होता रहा।
धोरों पर लगा मेला मरुमहोत्सव के अन्तिम दिन सम के धोरों पर मेला लगा रहा और पूरे क्षेत्रा में देश विदेश सैलानियों का भारी जमघट सर्द हवाओं के बावजूद धोरों के आंगन में मस्ती लूटता रहा। बडी संख्या में सैलानियों ने ऊँट गाडियों व ऊँटों पर बैठकर रेत के समुन्दर में भ्रमण का मजा लुटा। धोरों पर तजा सैलानियों ने खाने पीने की दुकानों का लुफ्त लिया। भारी संख्या में सैलानियों के जमावडें की वजह से उनके पद चापों से तेज हवाओं के साथ रेतली गति करती रही। देशी विदेशी सैलानियों ने सम के धोरों की यादगार को अपने कैमरे में कैद किया और पूरी मस्ती के साथ अलग अलग अदाओं में फोटो खिचवाए व बच्चों ने मखमली धोरों पर जमकर उछलकूद कर आनन्द लिया। रंग बिरगें परिधानों में हजारों संख्या में उमडें सैलानियों की वजह से सम के धोरे दूर से रंगीन दिखाई दिए। कई सैलानियों ने ऊँट पर बैठकर ऊँट दौड का आनन्द भी लिया।

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