पुरातन ग्राम्य संस्कृति के बिम्बों से रूबरू हुए देशी- विदेशी सैलानी
जैसलमेर, 7 फरवरी/ विश्वविख्यात मरु महोत्सव के तीसरे दिन देशीविदेशी सैलानियों ने जैसलमेर जिले में पालीवालों के परित्यक्त, वैभवशाली रहे गांव कुलधरा को देखा तथा प्राचीन ग्राम्य स्थापत्य और लोक जीवन के कल्पना लोक में अपने आप को पाया।
किसी जमाने में सर्वाधिक समृद्ध एवं उन्नत सभ्यता के धनी रहे कुलधरा गांव में पालीवालों का लोक जीवन, बसावट, शिल्पस्थापत्य और वास्तुशास्त्राीय नगर नियोजन जैसी कई विलक्षणताओं की झलक पाकर सैलानी पुराने युग के परिदृश्यों में खो गए।
इन सैलानियों ने कुलधरा गांव में खण्डहरों में विचरण करते हुए मन्दिर, मकानों के खण्डहर, गृह सज्जा व गृहप्रबन्धन, जल प्रबन्धन, ग्राम्य विकास आदि सभी पहलुओं को देखा तथा प्राचीन ग्राम्य प्रबन्धन की सराहना की। इन सैलानियों ने कुलधरा के ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी भी ली। जैसलमेर विकास समिति के सचिव चन्द्रप्रकाश व्यास तथा अन्य विशेषज्ञों ने सैलानियों को कुलधरा के प्राचीन इतिहास एवं महत्त्व से अवगत कराया।
देशीविदेशी सैलानियों एवं अतिथियों ने कुलधरा में उन भवनों को भी देखा जिन्हें पालीवालों की प्राचीन गृह व्यवस्था को दर्शाने के लिए विकसित किया गया है। सैलानियों ने कुलधरा में मशहूर कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए लोक संगीत और नृत्यों का भरपूर आनंद लिया।सैलानियों ने कुलधरा में जमकर फोटोग्राफी की और कुलधरा के अवशेषों और प्राचीन वैभव के प्रतीकों को अपने कैमरे में कैद किया। काफी संख्या में सैलानियों ने कुलधरा के समीप खाभा में भी खाभा फोर्ट और पुरातन अवशेषों का अवलोकन किया।

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