नेट यूजर की जिंदगी गूगल के बिना अधूरी सी
नेट यूजर की जिंदगी गूगल के बिना अधूरी सी लगती है। कुछ याद रखने की जरूरत नहीं, गूगल आपके लिए सबकुछ करेगा। चाहे एग्जाम का वेन्यू खोजना हो या मनपसंद मोबाइल का रिव्यू। यहां तक कि गूगल आपका होमवर्क भी कराता है। लेकिन तब क्या जब आपका यह दोस्त आपकी हर बात, हर हुक्म याद रखने लगे? ऐसे में यह डर बैठ जाना स्वाभाविक है कहीं यह दोस्त किसी और से आपकी चुगली ना कर बैठे। गूगल ने हाल में ऐलान किया है कि वह 1 मार्च यानी गुरुवार से अपनी प्रिवेसी पॉलिसी में बदलाव करने वाला है।
क्या है यह बदलाव
गूगल की लगभग 60 सर्विस हैं। इनमें खास हैं : जीमेल, जीटॉक, यूट्यूब, गूगल मैप्स, पिकासा वगैरह। पहले सबकी अलग प्रिवेसी पॉलिसी होती थी लेकिन अब नई कंबाइंड पॉलिसी में यूजर की सारी जानकारी एक जगह सहेज कर रखी जाएगी। गूगल का दावा है कि इससे यूजर की सर्च आसान हो जाएगी। उसकी पसंद-नापसंद के हिसाब से ही एड आएंगे।
इसका मतलब
अगर आपने किसी ब्राउजर पर गूगल की किसी सर्विस में लॉग इन कर रखा है, तो उस ब्राउजर पर आप जो कुछ भी करेंगे उसकी जानकारी आपके अकाउंट के तहत गूगल जमा करता रहेगा। इसमें भरे गए फॉर्म, देखे गए विडियो, सर्च, मेल कंटेंट और आईपी अड्रेस तक शामिल होगा। अगर जीपीएस वाला एंड्राएड मोबाइल है तो आपकी लोकेशन तक दर्ज होती रहेगी।
दिक्कत क्या है
डर है कि आपकी जानकारी का यह भंडार मार्केटिंग कंपनियों, आपके कंपटीटर, सरकार और यहां तक कि हैकरों को भी मिल सकती है।
क्या आपको डरना चाहिए?
यह आप पर निर्भर है कि आप नेट का यूज कैसे करते हैं। अगर आप अपनी संवेदनशील जानकारियों का लेनदेन गूगल सर्विस के जरिए करते हैं तो सावधान रहें। रही बात मनबहलाव के लिए सर्च करने की तो लॉग आउट होकर ऐसा करें।

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