सबूत खोजने कुएं में उतरी सीबीआई!

जयपुर/चौमूं. राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देश पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने वकील मुरलीधर यादव के आत्महत्या मामले की जांच शुरू कर दी है। सीबीआई की स्पेशल टीम डीआईजी एस. सुरेश के साथ गुरुवार सुबह 10.30 बजे सामोद के पास स्थित बरवाड़ा गांव पहुंची और यादव के निवास दांतरता की ढाणी और उस कुएं का मुआयना किया, जिसमें वह कूदा था।   

इस कुएं से सीएफएसएल टीम के सदस्यों ने मिट्टी व अन्य साक्ष्य एकत्र किए। टीम ने मुरलीधर के परिजनों व कुएं के पास रहने वाले लोगों के बयान भी दर्ज किए। गीता नामक महिला ने वकील को कुएं में कूदते हुए देखा था। सीबीआई ने इस महिला से भी पूछताछ की। सीबीआई शुक्रवार को हाइकोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।

वकील ने मुरलीपुरा के एक प्लॉट के विवाद को लेकर मंगलवार रात को कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली थी। परिजनों द्वारा मुरलीपुरा थाने के तत्कालीन थानाधिकारी, एएसआई व अन्य लोगों पर आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाते हुए सामोद थाने में मुकदमा दर्ज करवाया है।

कॉल डिटेल से होगा खुलासा

सीबीआई ने वकील के मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाई है। इसकी जांच से यह पता चल सकेगा कि वकील की किस पुलिस अधिकारी से कब-कब और कितने समय बात हुई। इसके अलावा किस-किस पुलिस अधिकारी और बाहरी व्यक्ति ने उसे फोन किया।

ये कर रहे है जांच

मामले की जांच के लिए सीबीआई के डीएसपी जी. बैरवा के नेतृत्व में स्पेशल टीम गठित की गई है। इसमें डीएसपी संजय शर्मा, इंस्पेक्टर नरेंद्र, मांगी लाल, सीएफएसएल दिल्ली की टीम के एक्सपर्ट सदस्य शामिल हैं।

ड्रेगन लाइट व लोरिंग मशीन से कराई देरी

सीबीआई टीम का काफी समय ड्रेगन लाइट और लोरिंग मशीन ने बर्बाद कर दिया। दरअसल, कुएं में रोशनी करने के लिए सीबीआई ने सामोद थाने से ड्रेगन लाइट मंगाई, लेकिन यहां लाइट नहीं मिली। इसके बाद इसे हरमाड़ा थाने से मंगवाया गया। इसके बाद कुएं में टीम के सदस्यों को उतारने के लिए जीप पर लोरिंग मशीन लगाई गई, लेकिन जब एक स्थानीय व्यक्तिकुएं में उतरा, तभी डीजल खत्म हो गया। डीजल मंगवाने के बाद टीम के सदस्यों को कुएं में उतारने की कार्रवाई शुरू हो पाई।

वकीलों ने नहीं की पैरवी

जयपुर. वकील मुरलीधर यादव के आत्महत्या मामले को लेकर गुरुवार को राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्यपीठ जोधपुर व जयपुर पीठ सहित प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों में वकीलों ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। इस कारण अदालतों में कामकाज प्रभावित हुआ। जोधपुर हाईकोर्ट में 1000 से ज्यादा तथा जयपुर में 1700 मामलों की सुनवाई प्रभावित हुई। जयपुर व जोधपुर की अधीनस्थ अदालतों सहित भीलवाड़ा, बीकानेर, उदयपुर, राजसमंद व पाली में भी न्यायिक कार्यो का बहिष्कार किया गया।

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