माधव महाविद्यालय में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित
बाड़मेर
माधव महाविद्यालय में बुधवार को विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इसमें छात्रों को संविधान एवं विभिन्न कानून के तहत प्रदत्त अधिकारों से अवगत कराया। अपर जिला एवं सेशन न्यायधीश सुरेंद्र खरे, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अजिज खान, अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश डॉ. सिंपल शर्मा, सिविल न्यायिक मजिस्ट्रेट ललित डाबी ने महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं को विधिक सेवा के बारें में जानकारियां दी।
अपर जिला एवं सेशन न्यायधिश सुरेंद्र खरे ने रैंगिग तथा विधिक सहायता के बारे मेें जानकारी देते हुए कहा कि बुजूर्ग माता-पिता का भरण पोषण करना पुत्र का कर्तव्य है। उसे इस कर्तव्य का पालन करना चाहिए। नाबालिग संतान के भरण पोषण का दायित्व पिता का होता है। इस दौरान उनकी देखभाल और जरुरतों की पूर्ति करना पिता का कर्तव्य है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अजिज खान ने बताया कि विधि की सामान्य जानकारियां हर छात्र को होनी चाहिए। मूल संविधान में अन्य कानून बनते रहते है। मूल संविधान के बाद ही कानून है। उसी मूल संविधान की जानकारी हर विधार्थी को होनी चाहिए। हमें विधि से संबंधित क्या-क्या जानकारियां होनी चाहिए। इन सबके लिए ही ये शिविर आयोजित किए जा रहे है।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डाॅ. सिंपल शर्मा ने शिविर मेें विधि की सामान्य जानकारियां, किशोरों के अधिकारों के बारे में जानकािरयां दी। कहा कि किशोर बोर्ड का गठन भी सरकार द्वारा किया गया है जिसमेंे 18 वर्ष से कम उम्र के किशाेर के अपराध करने पर उसी बोर्ड द्वारा सुनवाई की जाती है। 
उन्होंने रैंगिग के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि आपसे सीनियर या कोई छात्र मजबूरन कार्य करवाए जिसमें आपको शर्मिंदगी महसूस होती हो तो आप उसकी शिकायत एंटी रैंगिग कमेटी में कर सकते है। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय में एंटी रैंगिग कमेटी का गठन होना आवश्यक है। अगर किसी कॉलेज में कमेटी का गठन नहीं किया गया है तो सरकार संचालक के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। इस कमेटी में कॉलेेज संचालक भी होते है। साथ ही कानूनी समस्याओं से कैसे निपटा जाए इसको लेकर सवालों के समाधान भी बताएं।
न्यायिक मजिस्ट्रेट ललित डाबी ने बताया कि आप सभी छात्रों का संपर्क अलग-अलग आैर दूर-दराज के गांवोें से है और इन योजनाओं की जानकारियां लोगों तक पहुंचाएं और उनकी मदद करें तो अनपढ लोगों को दोगुनी सुविधा होगी। उन लोगों को खुशी होगी। उन्होंने कहा कि मानसिक रुप से अशक्त लोगों को बीमार नहीं समझे। उनके प्रति हमेशा सहयोग की भावना रखें। सहानुभूति से उनकी बातों को समझने की कोशिश करें।

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