न्याय आपके द्वार संकल्पना को साकार कर रही है मोबाईल वैन - पूर्णकालिक सचिव
जैसलमेर। 
विधिक सेवा कार्यक्रमों की क्रियान्विति में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण व राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की विभिन्न स्कीमों का लाभ आम जनता तक पंहुचाने तथा लोगों को विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विधिक साक्षरता शिविरों के आयोजन के लिए राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा भेजी गई मोबाईल वैन ने आज कोर्ट परिसर, कलक्ट्रेट जैसलमेर तथा मेला परिसर में लोक अदालत तथा बेटी बचाओ विषय पर जानकारियां दी।
शिविर में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जैसलमेर पूर्णिमा गौड द्वारा लोक अदालत के विषय में बताते हुए कहा गया कि लोक अदालत एक ऐसा सशक्त कानूनी माध्यम है जहां गरीब से गरीब व्यक्ति भी बिना एक भी पैसा खर्च किए न्याय प्राप्त कर सकता है, आगामी 8 अक्टूबर व 12 नवम्बर को आयोजित होने वाली लोक अदालत में अधिक से अधिक प्रकरणों को लोक अदालत में रखने एवं निपटाने हेतु अधिवक्ताओं एवं परिवादियों को आह्वान किया।
इसी क्रम में महिलाओं एवं बालिकाओं के विधिक अधिकारों की जानकारी देते हुए बताया कि महिलाएं समाज का महत्वपूर्ण एवं अभिन्न अंग हैं। महिलाओं के बिना समाज की परिकल्पना अधूरी है। सभी पारिवारिक कार्यों, उत्सवों और समारोहों में स्त्रियों की उपस्थिति प्रायः अपरिहार्य मानी जाती रही है। लेकिन बदलती हुई स्थितियों में महिलाओं को भोग की वस्तु माना जा रहा है वे यातनाओं का शिकार हो रही है, उनका शोषण किया जा रहा है समाज व परिवार में उपेक्षा की जा रही है। वर्तमान में कामकाजी महिलाओं के साथ बढ रहे यौन उत्पीड़न एवं घर में घरेलू हिंसा के मामलों को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा गम्भीरता से लिया गया है तथा कतिपय दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।
महिलाओं के महत्पूर्ण अधिकारों को विस्तार से बताया गया कि महिलाओं को विवाह के अवसर पर प्राप्त जेवर और अन्य वस्तुएं केवल उसी की ही सम्पति है। महिला अपने पति की सम्पति पर अधिकार रखती है। हिन्दू अधिनियम में महिलाओं को अपने पिता की सम्पति में भाई के बराबर हक प्राप्त है। बयान के लिए पुलिस किसी महिला को थाने पर आने के लिए विवश नहीं कर सकती है। महिला का शारीरिक परीक्षण महिला डॉक्टर द्वारा ही किये जाने का प्रावधान है। महिला अपराधी की उम्र 18 वर्ष से कम है तो उस पर मुकदमा किशोर न्यायालय में ही चलेगा। महिला अपराधी के साथ यदि छोटा बच्चा स्तनपान करता है तो उसे अपने साथ रख सकती है। स्वयं का भरण पोषण करने में असमर्थ महिला चाहे माता या पत्नी हो या पुत्री अपने पति, पुत्र एवं पिता से 2500 रूपए तक प्रतिमाह भरण पोषण भत्ता प्राप्त कर सकती है। महिला भी पुरूष के बराबर वेतन मजदूरी पाने की हकदार है। विधवा को विवाह करने का पूर्ण अधिकार है। चलचित्र ’नारी को अधिकार दो’ के माध्यम से लोगों को बेटी बचाओ का संदेश दिया गया।
इसके अलावा लोक अदालत, मध्यस्थता, पीडि़त प्रतिकर स्कीम, विधिक सहायता आदि के बारे में पेम्पलेट वितरित किये जाकर विधिक सेवा कार्यक्रमों का सघन प्रचार प्रसार किया गया। मोबाईल वैन में प्राधिकरण के कर्मचारी वरिष्ठ लिपिक रमेश गर्ग, कनिष्ठ लिपिक आकाश खत्री, वैन चालक श्रवण सिंह ने अपनी सेवाएं दी।

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