अब घर और संस्थानों की छतों पर हो सकेगा सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन 
25 मेगावॉट क्षमता के सोलर रूफ टॉप सिस्टम स्थापित किये जाने की स्वीकृत 
बाड़मेर।
भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने प्रदेश में 25 मेगावॉट क्षमता के सोलर रूफ टॉप सिस्टम स्थापित किये जाने की स्वीकृति प्रदान की है। रूफ टॉप प्रणालियों की स्थापना किये जाने के लिए राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड ने 25 आपूर्तिदाताओं का चयन किया है। सोलर रूफ टॉप प्रणालियों की स्थापना के इच्छुक लाभार्थी इसके तहत 1 किलोवॉट से 500 किलोवॉट क्षमता के प्रोजेक्ट स्थापित करवा सकेंगे। 
राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड के प्रबन्ध निदेशक बी.के. दोसी ने बताया कि रूफ टॉप प्रणाली की स्थापना पर भारत सरकार द्वारा 30 प्रतिशत राशि अनुदान के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी तथा अनुदान का लाभ समस्त रिहायशी भवनों, नॉन प्रोफिट संस्थानों यथा स्कूल, हॉस्टल, हॉस्पिटल आदि तथा गैर लाभ वाले सामाजिक संस्थान यथा सामूदायिक भवन, ट्रस्ट, एन.जी.ओ. आदि को दिया जाएगा। इस योजना के अन्तर्गत राजकीय भवन एवं संस्थाएं, निजी वाणिज्यिक संस्थान तथा औद्योगिक क्षेत्र के भवन शामिल नहीं होंगे।
उन्हांेने बताया कि राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग ने 26 फरवरी, 2015 को नैट मीटरिंग रेग्यूलेशन जारी किया है, जिसके तहत रूफ टॉप एस.पी.वी. सिस्टम से उत्पादित की जाने वाली बिजली का लाभ लाभार्थी को दिया जाएगा। नैट मीटरिंग रेग्यूलेशन के अनुसार सोलर पॉवर प्लांट से उत्पादित अतिरिक्त ऊर्जा, जो ग्रिड में जाएगी, इसका भुगतान राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग द्वारा वित्तीय वर्ष में लागू की गई निर्धारित दरों पर डिस्कॉम्स द्वारा लाभार्थी को किया जाएगा। नैट मीटरिंग रेग्यूलेशन के अनुसार इच्छुक लाभार्थी अपने कनेक्टेड,सेंक्शन्ड लोड का अधिकतम 80 प्रतिशत तक का रूफ टॉप सिस्टम लगवा सकता है। यदि लाभार्थी एक किलोवॉट से 10 किलोवॉट तक का रूफ टॉप सिस्टम लगवाता है तो 47 हजार 845 रुपए प्रति किलोवॉट, 10 किलोवॉट से अधिक एवं 50 किलोवॉट से कम के सिस्टम की कीमत 44 हजार 275 रुपए प्रति किलोवॉट एवं 50 किलोवॉट से अधिक तथा 500 किलोवॉट तक के सिस्टम की कीमत 41 हजार 930 रुपए प्रति किलोवॉट देय होगी। यह राशि 30 प्रतिशत अनुदान के उपरांत देय है। दोसी ने बताया कि इस योजना के अन्तर्गत प्रदेश की रिहायशी, सामाजिक एवं नॉन प्रोफिट संस्थानों की छतों पर बैट्री रहित सोलर सिस्टम की स्थापना की जाएगी, जिससे उत्पादित सौर ऊर्जा को बिजली के नैट-मीटर में दर्ज किया जाएगा। यदि उपभोक्ता की ओर से उपभोग में ली गई बिजली सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली से कम होगी तो अतिरिक्त उत्पादित बिजली का समायोजन डिस्कॉम आगामी बिल में कर देगा। इसी प्रकार यदि उपभोक्ता द्वारा उपयोग में ली गई बिजली सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली से अधिक होगी तो उपभोक्ता को केवल अन्तर राशि का ही भुगतान करना होगा। एक किलोवॉट क्षमता के रूफ टॉप सिस्टम से प्रतिदिन औसत लगभग 4 से 5 यूनिट का उत्पादन संभव होगा तथा प्रत्येक रूफ टॉप प्रणाली का 5 वर्ष तक रख-रखाव (Comprehensive Maintenance) संबंधित Empanelled vendors को करना होगा। रूफ टॉप योजना के Empanelled vendors की सूची एवं योजना के बारे में विस्तृत जानकारी निगम की वेबसाइट www-rrecl-com
एवं energy-rajasthan-gov-in/rrecl पर उपलब्ध है।

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