महात्मा गांधी नरेगा कार्याें पर रहेगी तीसरी आंख की नजर
बाड़मेर।
महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत कराए कार्यों की निगरानी अब तीसरी नजर करेगी। इससे मनरेगा में सरकारी धन की चोरी, भ्रष्टाचार रोकने और पारदर्शिता लाने में मदद मिलेगी। इसके तहत योजनान्तर्गत कराए सभी कार्यों पर जियो टैग लगाया जाएगा। ग्रामीण रोजगार की इस प्रमुख योजना में अनियमितता की शिकायत पर काबू पाने में आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाएगा।
महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत सालाना ग्रामीण बेरोजगारों के लिए कार्य दिवस सृजन के साथ बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के लिए 30 से 40 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय को कराए गए कार्यों संबंधित काफी शिकायतें मिल रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर जियो टैग लगाने की शुरूआत की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मनरेगा की एक समीक्षा बैठक में सार्वजनिक धन के लीकेज को रोकने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग की जरुरत बताई थी। नई व्यवस्था के मनरेगा योजना के तहत कराए कार्यों की आन लाइन रिकार्डिंग और कारगर निगरानी का बंदोबस्त किया जा रहा है। इससे भविष्य में कराए जाने वाले कार्यों में अनियमितता को रोकने में मदद मिलेगी। जियो टैगिंग में कराए कार्य का पूरा ब्यौरा दर्ज होगा, जिससे उसके लोकेशन का पता किया जा सकेगा। ग्रामीण विकास सचिव अमरजीत सिन्हा के मुताबिक ग्रामीण विकास मंत्रालय और इसरो के बीच इस संबंध मंे 24 जून को एक समझौता हो चुका है। जियो टैगिंग से अतिरिक्त विकास में सहूलियत मिलेगी। मनरेगा के तहत प्राकृतिक संसाधन प्रबंध में जल संरक्षण, भू-संसाधन विकास एवं सिंचाई क्षेत्र में बहुत अधिक कार्य कराए गए गए हैं। इनके अलावा बांध, सिंचाई चैनल्स, चेकडैम, जलाशय, तालाब और आंगनवाड़ी के साथ टांका निर्माण के कार्याें को प्राथमिकता दी जाती है। अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक सुरेश कुमार दाधीच के मुताबिक बाड़मेर जिले मंे जियो टैग के लिए अधिशाषी अभियंता बाबूलाल सेठिया को प्रभारी अधिकारी बनाया गया है। वे प्रशिक्षण लेने के लिए जयपुर जाएंगे।
28 जिलांे से होगी शुरूआतः महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत होने वाले कामकाज की तस्वीरें लेने के लिए इसरो ने एक महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। इसरो के वैज्ञानिकों ने 28 जिलों में एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत जियो-मनरेगा के तहत कामकाज की बेहतर निगरानी के लिए इंडियन रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट से हजारों हाई-रिजोल्यूशन तस्वीरें लेनी शुरू कर दी हैं जिन्हें जियो-टैग किया जाएगा। सेटेलाइट से जो तस्वीरें ली जाएंगी वे एकदम सही होंगी। उनसे किसी तरह की छेड़छाड़ संभव नहीं हो सकेगी।
सितंबर में 100 जिलों में शुरू होगा प्रोजेक्टः शुरूआती तौर मंे 28 राज्यों की 28 ग्राम पंचायतों में लांच किए गए पायलट प्रोजेक्ट के तहत नरेगा कार्याें की तस्वीरें ली गई हैं। इसरो की मदद से जियो-मनरेगा को 1 सितंबर तक देश के 100 जिलों और एक नवंबर से बाकी के 528 जिलों में शुरू करने की कवायद चल रही है। इसरो चेयरमैन के मुताबिक अगर हम लेटिट्यूट और लांगिट्यूट की सही तरीके से पहचान कर लेते हैं तो इससे उस जगह की पुख्ता पहचान मिल जाएगी।
सालाना 30 लाख निर्माण मनरेगा में:देश में महात्मा गांधी नरेगा योजनान्तर्गत सालाना 30 लाख रचनाओं का निर्माण होता है। निर्माण कार्यों की बेहतर निगरानी के लिए सरकार अब इनका डाटाबेस बनाना चाहती है। ताकि इसके जरिए इन कार्यों की मानिटरिंग और अधिकारियों की जवाबदेही बेहतर तरीके से तय की जा सके।

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