बाड़मेर में 8 वें दिन दलितों ने इंसाफ नही मिलने पर काली पट्टी बांध किया प्रदर्शन 
बाड़मेर।
महापड़ाव के 8 वें दिन भी इंसाफ नही मिलने पर गुस्सा होकर काली पट्टी बांध प्रषासन एवं पुलिस के सामने प्रदर्षन कर रोष जताया। उल्लेखनिय रहे कि जिला कलक्ट्रेट के बाहर दुष्कर्म, जानलेवा हमले, रहवासी मकान एवं खेतों से बाहर धकेल कब्जे करने जैसे गंभीर अपराध तथा अत्याचारों से दुखी दलित समुदाय के लोगों को इंसाफ दिलाने के लिए महापड़ाव चल रहा हैं। 
दलित अत्याचार निवारण समिति के संयोजक उदाराम मेघवाल ने बताया कि बुधवार को भारी बारिष के चलते आसमां तले महापड़ाव पर बैठे दलितों ने प्रषासन एवं पुलिस के ढीले रवैये पर रोष जताया और प्रदर्षन कर सरकार को चेतावनी दी कि उन्हें इंसाफ नही मिलने तक वह डटे रहेंगे।
उन्होने बताया कि पुलिस उत्पीड़न एवं अत्याचारों के षिकार दलित समुदाय के लोग एवं महिलाएं भी महापड़ाव स्थल पर नदी के रूप मे चल रहे बरसाती पानी के बावजूद भी न्याय की जंग लड़ने का ऐलान किया हैं। उन्होने बताया कि बुधवार को महापड़ाव स्थल पर बड़ी संख्या मे ग्रामीण दलित पहुंचे और समर्थन का विष्वास दिलाया हैं।
धरना स्थल पर सम्बोधन करते हुए जिलाध्यक्ष कच्ची बस्ती प्रकोष्ठ भैरूसिंह फुलवारिया ने कहा कि 3 महिने पहले से दर्ज मुकदमों मे भी पुलिस नामजद आरोपियों को गिरफ्तार नही कर रही हैं जबकि 8 दिन से महापड़ाव भी चल रहा हैं। मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन मे लिखा हैं कि लोकतंत्र मे कमजोर वर्ग पर हो रहे अत्याचार निंदनीय हैं। भील समाज के अध्यक्ष भूराराम भील ने कहा कि हमें हिन्दू धर्म ही छोड़ देना चाहिए। क्योंकि हमें हमेषा इस राम, कृष्ण, षिव के पुजारियों ने अपमाणित व प्रताड़ित किया है। इस धर्म के मन्दिरों व मठों में दलितों का प्रवेष वर्जित है ऐसे धर्म को छोड़ने के सिवाय हमारे पास कोई रास्ता नहीं है। हमे आन्दोलन को प्रत्येक खण्ड स्तर तक फैलाना पड़ेगा। सफाई मजदुर संघ के राष्ट्रीय सचिव रामदास सांगेला ने कहा कि पीड़ितों का सहयोग व अपराधियों का सामना करो। कमठा मजदुर यूनियन के जिलाध्यक्ष लक्ष्मण बडेरा ने कहा कि देखते है कातिलों की बाजुओं में कितना दम है और कितने दिन बाबा साहेब के बनाये कानून व दलितों के न्यायिक संघर्ष के सामने टिकते है। इनका वही हाल होगा जो रावन का हुआ था। डांगावास, घेनरी काण्ड, गलाराम भील हत्या, पोलाराम पूर्व सरपंच हत्याकाण्ड, डेल्टा प्रकरण, सणाउ, धनाउ, बावड़ीकलां सहित प्रकरणों का जिक्र करते हुए कहा कि राजस्थान में शासन नाम की कोई चीज नहीं है। यहां जंगल राज चल रहा है। सरकार अपना धर्म नहीं निभा रही है। जिसे आने वाले समय में दलित किसी भी सुरत में माफ नहीं करेगें। जो जन प्रतिनिधी राजछाप हैं वह आने वाले समय में रोड़छाप हो जायेगें। गरीबों की बददुआं से नहीं बचेगें। आचार्य रूपाराम नामा ने कहा कि दिल में दर्द पैदा होना चाहिए। धर्माराम पंवार ने कहा कि शासन और प्रषासन को हम चैन से नहीं सोने देगें। लोजपा के हरखाराम मेघवाल ने कहा कि यहां शासन नाम की कोई चीज नहीं है। पुलिस व प्रषासन अपराधियों को बचाने में लगा हुआ है। लेकिन उसमें उनको कामयाब नहीं होने देगें। सभा को मांगीलाल मंसुरिया जिला परिषद् सदस्य किषनलाल भील, कालुराम भील व सवाईराम मेघवाल, पुनाराम एहम्पा ने सम्बोधित किया। महापड़ाव में जोगाराम जसाई पुर्व सरपंच, जेसाराम बोचिया, सवाईराम इटादा, किषनाराम मंसुरिया, बांकाराम नामा, हरीष सेजु, छुगाराम पंवार तारातरा, पार्षद सोहनलाल व खेतेष कोचरा, मूलाराम पुनड़, मूलाराम परिहार, गाजीराम, आम्बाराम उण्डखा, भमराराम जुड़िया, हजारी राम मंसुरिया, नवाराम मंसुरिया, चुतराराम मंसुरिया, मीठुराम बामणोर, षिवाराम भीमडा, टाउराम बोस, प्रतापाराम धनाउ, गेमराराम सणाउ सहित बड़ी संख्या में पीड़ित पक्ष के लोग उपस्थित थे।

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