गुरू शिष्य के मिलन की अनूठी मिशाल बना ब्रह्मसर

100वीं यात्रा के बाद अब पैदल संघ निकालेगा मण्डल

गुरू पूर्णिमा को कुशल दर्शन मित्र मण्डल की 100वीं यात्रा पर सजा दादा का दरबार
जैसलमेर। 
आठ वर्ष पूर्व गुरू के प्रति समपर्ण का भाव रखते हुए वसी मालाणी रत्नषिरोमणि ब्रह्मसर तीर्थोद्वारक उपाध्याय गुरूदेव प्रवर मनोज्ञसागर म.सा. के आदेष को षिरोर्धाय करते हुए कुषल दर्षन मित्र मण्डल ने ये सफर शुरू किया था साथ मिलता गया ओर कारवा बनता गया ओर 100 माह तक गुरू दर्षन का सपना गुरू र्पूिर्णमा के दिन पूरा हो गया। कुषल युवा मण्डल जैसलमेर,जिनकुषलसूरी ब्रह्मसर ट्रस्ट ने कभी हौसले को कमजोर नही होने दिया। इस एतिहासिक मौके पर मण्डल की ओर से बाड़मेर से ब्रहमसर गुरू के दरबार मेे पैदल यात्रा संघ ले जाने की घोषणा भी की गई। पैदल संघ की तिथि आगामी बैठक के बाद घोषित की जायेगी। कुषल दर्षन मित्र मण्डल के राजू वडेरा व कपिल मालू ने बताया कि 100 वीं यात्रा को यादगार बनाने के लिए ब्रहमसर मन्दिर को फूलो से सजाया गया वही रात को लेकर लाईटिंग के साथ साथ सैकड़ो दीपक की रोषनी ओर पूर्णिमा में चांद की दुधिया रोषनी से दादा का दरबार देखते ही मन मौह रहा था। इस खास मौके पर रात्री भजन सध्या में कलाकरो के गीतो ने जैसे दादा को दरबार में आने को मजबुर कर दिया। इस मौके को खस बनाने के लिए पूजा अर्चना के साथ साथ दादागुरूदेव व विमलनाथ भगवान की विषेष प्रकार से आंगी रचना की गई। इस पावन अवसर पर ब्रहमसर ट्रस्ट के महामंत्री गेनीराम मालू ने कहा कि सम्भवतया ये पहला मौका की कोई संगठन लगातार 08 वर्षो से दादा के दरबार में सैकडो दादा भक्तो के साथ हर माह आते है। उन्होने कहा कि इस मण्डल की ओर से ऐसे कई है जो दुनिया के किसी भी कोने मे थे मगर पूर्णिमा के यहा हाजरी जरूर दी है उन्होने इस ऐसे ही रमेष मालू कानासर का विषेष तौर से साधुवाद दिया 100 माह तक लगातार आ रहे है। साथ ही मण्डल के पारसमल गोठी को अभिनन्दन ट्रस्ट मण्डल की ओर से किया गया। 

ये हुए विषेष आयोजन-

बाड़मेर,,लौद्रवपुर , ब्रह्मसर तीर्थ की यात्रा करायी गयी। यात्रा संघ 3 बसो के साथ स्थानीय आराधना भवन बाड़मेर से रवाना होकर प्रातः 11 बजे लौद्रवपुर तीर्थ पहुंचा जहां पाष्र्वनाथ दादा के दर्षन कर पूजा अर्चना की गई और मनोकामना पूर्ण करने वाला कल्पवृक्ष,अधिष्ठायक नागदेवता,प्राचीन रथ सहित अधिष्ठायक घंटाकर्ण महावीर देव व दादा गुरूदेव के दर्षन वंदन का लाभ लिया। इस अवसर पर ष्षान्ती स्नात्र महापूजन का आयोजन किया गया जिसमें स्थानीय कलाकारो ने पूजन में पाष्र्वनाथ दादा के भजनो की प्रस्तुतियां देकर झुमने पर मजबुर कर दिया। पूजन के पष्चात संघ लौद्रवपुर से ब्रह्मसर की ओर प्रस्थान कर गया।

गुरूभक्त पुखराज म्याजलार व भूरचन्द सियाणी ने बताया कि ब्रह्मसर दादावाडी प्रांगण में दादा जिन कुषलसूरी गुरूदेव के चरण पादुकाओं के आगेें महापूजन का आयोजन किया गया।पूजन के दौरान म्याजलार नेे बताया कि प्रकाष पारख एण्ड पार्टी द्वारा भजनो की षानदार प्रस्तुतियां दी गई। बाडमेंर से पधारे बाल कलाकार गौरव मालू व अषोक बोथरा द्वारा प्रस्तुत भजन ’अपनी आंचल की छैया में जब भी मुझे सुलाओ मां एवं पूनम का है दिन दादा आज थाने आणो है ’ भजन पर भक्त जमकर झुमे।सियाणी ने बताया कि महापूजन के बाद महाआरती का आयोजन किया गया। विमलनाथ भगवान की आरती कुन्दनमल मुलचन्द राखेचा व विमलनाथ भगवान के मंगल दीपक का लाभ दुर्गादास नेमीचन्द डूंगरवाल देवडा एवं दादा गुरूदेव की आरती का लाभ पारसमल वीरचन्द छाजेड सियाणी वाले व दादा गुरूदेव के मंगल दिपक का लाभ मांगीलाल राणामल मालू अगडावा वाले एवं नाकोडा भैरव देव की आरती का लाभ प्रकाषचन्द रिखबदास बोहरा राणासर वालो ने लिया। सुबह के नाष्ते व सुबह व षाम की नवकारसी का लाभ कुषल दर्षन मित्र मण्डल बाडमेर ओर से लिया गया।षाम को तीर्थकर विमलनाथ भगवान और दादा जिनकुषल गुरूदेव की आंगी रचाई गई तथा गुरूदेव का सामुहिक इक्कतीसा का पाठ का आयोजन हुआव इसके बाद रात्रि भक्ति का कार्यक्रम हुआ।

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