विधायक की अश्लील सीडी का मामला, कोर्ट में फेल
बाड़मेर
अश्लील सी डी प्रकरण में न्यायिक मजिस्टे्रट बाड़मेर ने अभियुक्त महावीर जैन, जगदीश खत्री एवं हरीश चाण्डक के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए अन्तिम आदेश पारित किया, जिसमें अभियुक्तों के विरुद्ध लम्बित दाण्डिक कार्यवाही पूर्ण रुप से समाप्त करते हुए अभियुक्तों को क्लिन चिट दी गई। प्रकरण की एफ.आईआर उच्च न्यायालय की ओर पहले ही निरस्त की जा चुकी है।

यह था सी डी प्रकरण
5 जून 2012 को पुलिस अधीक्षक बाड़मेर के समक्ष बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन ने एक परिवाद पेश किया, जिसमें बताया गया कि महावीर जैन ने जगदीश खत्री, हरीश चाण्डक के मार्फत दस लाख रुपए मांग की । इन्होंने विधायक व उनके भाई के समक्ष दावा किया कि विधायक की अश्लील सी डी उनके पास है।
विधायक ने तीनों के विरुद्ध ब्लेकमेल करने का आरोप लगाया। इस पर कोतवाली पुलिस ने प्रथम सूचना रिपोर्ट संख्या 255 अन्तर्गत धारा 384, 385, 500 आई,पी,सी दर्ज करके तीनों को गिरफ्तार कर इनके विरुद्व चार्जशीट न्यायालय में प्रस्तुत की।
उच्च न्यायालय में याचिका दायर की
अभियुक्तगणों ने उक्त मुकदमा झूठा बताते हुए उच्च न्यायालय जोधपुर में एक याचिका प्रस्तुत की। जहां अभियुक्तों के विरुद्व धारा 384 में कोई अपराध नहीं बनना पाए जाने के कारण इस धारा से मुक्त करते हुए अधीनस्थ न्यायालय को अन्तिम कार्यवाही के निर्देश दिए गए।
शेष बची धाराओं 385, 500 के लिए अभियुक्तगणों ने अतिरिक्त सेशन न्यायाधीश के समक्ष अलग-अलग निगरानी याचिकाएं पेश की। बाद सुनवाई सेशन न्यायाधीश प्रथम ने विचारण न्यायालय के रिकार्ड को तलब करते हुए उसकी ओर से लिए गए प्रसंज्ञान आदेश के क्रियान्वयन पर भी रोक लगाई। इस दौरान परिवादी मेवाराम जैन व अभियुक्त महावीर जैन के मध्य एक समझौता सेशन न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जिस पर न्यायालय ने धारा 500 में समझौता स्वीकार किया व धारा 385 नॉन कम्पोडेबल होने की वजह से समझौता योग्य नहीं माना।
अभियुक्त महावीर जैन ने सेशन न्यायालय के उक्त आदेश को उच्च न्यायालय राजस्थान में चुनौती दी व आग्रह किया कि सेशन न्यायालय का उक्त आदेश निरस्त किया जाएं, परन्तु उच्च न्यायालय ने दर्ज एफ.आई.आर, पुलिस चार्ज शीट, याचिका में उपलब्ध समस्त साक्ष्यों व भिन्न-भिन्न उच्च न्यायालयों व सर्वोच्च न्यायालय के ट्टष्टंातों पर मनन करते हुए सम्पूर्ण प्रथम सूचना रिपोर्ट 255/12 व उक्त रिपोर्ट के आधार पर विचारण न्यायालय में संस्थित एवं लम्बित समस्त कार्यवाही को निरस्त करने के आदेश प्रदान किए।

कार्यवाही पूर्ण रूप से निरस्त करने के आदेश

उच्च न्यायालय के उक्त आदेशों की पालना में सेशन न्यायालय बाड़मेर ने अपने पास लम्बित फौजदारी निगरानी याचिकाओं को निस्तारित करते हुए उच्च न्यायालय के आदेश की पालनार्थ उक्त मामला पुन: विचारण न्यायालय को भिजवा दिया। जिस पर विचारण न्यायालय के न्यायिक मजिस्टेट बाड़मेर ने उच्च न्यायालय की एकल खण्ड पीठ दंडिक विविध याचिका संख्या 3456/2015 में आदेश पारित 11 दिसम्बर 2015 की पालना में अभियुक्तगणों के विरुद्व लम्बित यह दाण्डिक कार्यवाही पूर्ण रुप से समाप्त करने के आदेश प्रदान किए।

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