चातुर्मास जीवन,व्यवहार एवं सोच बदलने के लिए-मुनि मनोज्ञ सागर
बाड़मेर ।
जैन ष्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ के वसीमालानी रत्न षिरोमणि ब्रह्मसर तीर्थोद्वारक मुनि मनोज्ञ सागर जी म.सा. एवं मुनि नयज्ञ सागर जी म.सा आदि ठाणा -2 का भव्य षोभायात्रा के साथ चातुर्मास नगर प्रवेष बीकानेर की धरा पर सम्पन्न हुआ। प्रवेष के दौरान बीकानेर नगर को भव्य रूप से सजाया गया। ष्षोभायात्रा के जुलुस की आभा देखते ही नजर आ रही थी। कुषल दर्षन मित्र मण्डल के पारसमल गोठी एवं कपिल मालू ने बताया कि षोभायात्रा शहर खंचाजी मार्केट से प्रारम्भ हुई जो शहर के मुख्य मार्गाे से होती हुई रांगडी चैक सुगनजी महाराज के उपाश्रय पहुंची। मालू ने बताया कि शोभायात्रा में मंगल कलष धारण किये महिलाएंे चार्तुमास के गीत गाते हुए चल रही थी वही बीकानेर के प्रसिद्ध बैण्ड की ओर से धर्म की प्रभावना करते हुए मंगल गीत की स्वर लहरियां माहौल को धर्ममयी बना रही थी। शोभायात्रा में साथ चल रहे श्रावक श्राविकाएं भगवान महावीर के जयकारें एवं गुरूजी मारो अन्र्तनाद अमने आपो आर्षीवाद की जय घोष से बीकानेर नगरी धर्ममय हो गई। मालू ने बताया कि उपाश्रय पहुंचने के बाद शोभायात्रा धर्मसभा में परिर्वतित हो गई। इस अवसर पर मुनि मनोज्ञ सागर ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि वर्षावास में बरसने वाली निर्मल बारिष की तरह अपने मन को भी निर्मल करने का समय है। उन्होने कहा कि बीकानेर की धन्य धरा पर उनका ये तीसरा चातुर्मास है। इससे पूर्व वर्ष 1995 व 1999 में चातुर्मास किया था। उन्होने बीकानेर में हुए पूर्व के चार्तुमास के कुछ यादगार पल भी बताये। उन्होने कहा कि बीकानरे की धरा से उन्हे बहुत लगाव है। मुनि मनोज्ञ सागर ने कहा कि चातुर्मास जीवन, व्यवहार ,वाणी व सोच परिवर्तन के लिए है। उन्होने कहा कि आज की आधुनिक युग में अपने लिये समय नही होता उन्होने कहा कि कुछ समय अपने लिये निकालते हुए अपने आप को ईष्वर से जोडकर देख स्वयं ही ईष्वर से आप का जुडाव हो जायेगा। इस अवसर पर ख्रतरगच्छ संघ के पूर्व मंत्री घेवरचन्द मुसरफ,छगनलाल भूगडी, मोतिलाल मालू,केवलचन्द छाजेड़,महेन्द्र बाफना,,अनुपलाल मणिकपुरी सहित कई लोगो ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए चार्तुमास में अपने आप का धर्म से जोडने की बात कही। इस अवसर पर देषभर से गुरूभक्त गुरूदेव के प्रवेष में शामिल हुए। 

बहेगी तप आराधना की अविरल धारा- कपिल मालू ने बताया कि चार्तुमास के दौरान पयुषर्ण महापर्व पर विषेष तौर से तप आराधना की अविरल धारा बहेगी वही चार माह तक दैनिक प्रवचन के साथ साथ महापूजन सहित कई आयोजन होगे। मालू ने बताया कि चार के दौरान धर्म के साथ साथ पारिवारिक,सांसरिक,ज्ञान,तप,मन की सुन्दरता सहित कई विषयों पर प्रवचन माला का आयोजन होगा। 

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