बाड़मेर और बालोतरा में बना कांग्रेस का बोर्ड, बाड़मेर में बोथरा और बालोतरा में खत्री बने सभापति

बाड़मेर 
नगर परिषद चुनावो में करारी हार झेल चुकी बीजेपी को एक और हार का सामना करना पड़ा है बुधवार को बाड़मेर और बालोतरा में सभापति के चुनावो में कांग्रेस के उम्मीदवार ने परचम लहराया।  बाड़मेर में लूणकरण बोथरा ने भाजपा के दिलीप पालीवाल को 4 वोटो से हराकर बाड़मेर शहर में कांग्रेस ने सभापति की कुर्सी पर कब्जा जमा दिया है और बालोतरा में कांग्रेस के रतन खत्री  ने एक वोट से जीत कर सभापति की कुर्सी पर कब्जा जमा दिया है।  लूणकरण बोथरा को 40 में 22 वोट मिले जबकि दिलीप पालीवाल को 40 में 18 वोट मिले कांग्रेस की जीत में तीन निर्दलीयों का अहम योगदान रहा गौरतलब है की कांग्रेस को 19 सीट हाथ लगी थी और शहर में बोर्ड बनाने के लिए 21 सीटो की जरूरत थी ऐसे में कांग्रेस को बोर्ड बनाने के लिए 2 अन्य साथियो की जरूरत थी निर्दलीय पार्षद सुरतान सिंह ,रेणु दर्जी और मीरा ने कांग्रेस के समर्थन में वोट कर शहर में कांग्रेस का बोर्ड और सभापति बन गए।  


कांग्रेस का सुरक्षित खेल 

कांग्रेस के अंदर विरोध के स्वर उठते देख मेवाराम जैन रिड़मलसिंह दाता की धर्मपत्नी को लाख चाहते हुए भी बुधवार को सभापति पद के दावेदार के रूप में नही ला सके इससे दाता ग्रुप के दबाव के चलते सभापति या उपसभापति का पद राजपूत समाज को मिलने की संभावना जताई थी सूत्रों के हवाले से आई खबर के अनुसार मंगलवार को मनोहरकंवर का नाम सामने आने के बाद कांग्रेस के अन्य पार्षद लूणकरण जैन ने बगावत कर ली इस बगावत और निर्दलीयों पार्षदो की संख्या को देखकर भाजपा मंगलवार को जोड़ तोड़ के आधार पर भरकस प्रयास किया एक तरफ जहाँ भाजपा के सारे प्रत्यासियो की बाड़े बंदी की हुई वही दूसरी तरफ बीजेपी ने जोड़ तोड़ करने के लिए बलवंतसिंह भाटी और दिलीप पालीवाल को शहर में खुला रखा गया इन दोनों ने मिलकर कई निर्दलीयों से सम्पर्क किया और कुछ निर्दलीयों को रिझाने में कामयाब रहे इसकी भनक लगते ही मेवाराम जी को अपना प्लान बदलना पड़ा और लूणकरण को सभापति प्रत्यासी बनाकर सेफ गेम खेल लिया ! 

भाजपा ने देर से किया पालीवाल पर भरोसा

भाजपा ने दिग्गज दिलीप पालीवाल को सभापति का प्रत्यासी बनाने में देर कर दी और बड़ी जहोदाद के बाद जब आज सुबह सभापति का उम्मीदवार बनाया गया।  गौरतलब है की भाजपा को उम्मीद थी की दिलीप पालीवाल के नाम पर कांग्रेस में फुट पड़ेगी और शहर में अपना सभापति बना लेंगे लेकिन दिलीप पालीवाल का चेहरा आगे करने के बावजूद भी 2 निर्दलीयों का ही साथ मिला पालीवाल को कुल 18 वोट मिले जबकि भाजपा के पास 16 सीट थी ऐसे में निर्दलीय अनिल कुमार और बांकराम ने भाजपा के पक्ष में वोट डाला

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